Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस पार्षद Ishrat Jahan को मिली जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील को खारिज कर दिया है। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़ा है। कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला स
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस पार्षद Ishrat Jahan को मिली जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील को खारिज कर दिया है। यह मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश से जुड़ा है। कोर्ट ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि वह निचली अदालत के आदेश में दखल नहीं देगा।
इशरत जहां को जमानत क्यों मिली और कोर्ट ने क्या कहा?
Karkardooma Court ने 14 मार्च 2022 को Ishrat Jahan को जमानत दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा ने पाया कि जमानत मिलने के बाद चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है और इस दौरान इशरत ने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं दे रहा है, बस अपील को खारिज कर रहा है।
दिल्ली पुलिस ने क्या दलीलें दी थीं?
दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में तर्क दिया था कि निचली अदालत का फैसला कानून के खिलाफ था। पुलिस का कहना था कि:
- इशरत जहां और अन्य आरोपियों ने मिलकर साजिश रची थी।
- सड़कों पर किया गया ‘चक्का जाम’ एक आतंकवादी कृत्य था।
- अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब हिंसा भड़काना नहीं होता।
- इशरत अन्य साजिशकर्ताओं के साथ गहराई से जुड़ी हुई थीं।
केस की अब तक की मुख्य बातें क्या हैं?
| विवरण |
जानकारी |
| गिरफ्तारी की तारीख |
26 फरवरी 2020 |
| FIR नंबर |
59/2020 |
| मुख्य आरोप |
हत्या का प्रयास और दंगा भड़काना |
| बैल की स्थिति |
मार्च 2022 में जमानत मिली, अप्रैल 2024 में शर्तों में बदलाव हुआ |
| कोर्ट की टिप्पणी |
इशरत ने चक्का जाम का विचार नहीं बनाया था और न ही किसी व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थीं |