Finance : दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज BitBNS की सीबीआई (CBI) जांच की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम
Finance : दिल्ली हाई कोर्ट ने क्रिप्टो करेंसी एक्सचेंज BitBNS की सीबीआई (CBI) जांच की मांग करने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की जरूरत लगे। यह मामला उन निवेशकों से जुड़ा था जिन्होंने एक्सचेंज पर पैसों की हेराफेरी और विड्रॉल में दिक्कत का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस पुरुषिंद्रकुमार कौरव ने इस मामले की सुनवाई करते हुए साफ किया कि BitBNS एक प्राइवेट कंपनी है। भारतीय संविधान के आर्टिकल 12 के तहत इसे ‘राज्य’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी कानून के वह नए नियम नहीं बना सकता और न ही ऐसी स्थिति में सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है जब कोई असाधारण परिस्थिति न हो।
क्रिप्टो नियम बनाना किसका काम है?
अदालत ने स्पष्ट किया कि क्रिप्टो करेंसी के लिए कानून बनाना न्यायपालिका का काम नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार संस्थाएं और विभाग नीचे दिए गए हैं:
- भारत सरकार और संसद
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
- सेबी (SEBI)
- वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance)
परेशान निवेशकों के पास अब क्या रास्ता है?
कोर्ट ने उन निवेशकों को सलाह दी है जिन्हें अपने पैसों की समस्या आ रही है। कोर्ट के मुताबिक पीड़ित लोग इन कानूनी रास्तों को अपना सकते हैं:
| विकल्प |
कहाँ जाएं |
| पुलिस शिकायत |
नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराएं |
| कानूनी कार्रवाई |
संबंधित मजिस्ट्रेट के पास जाएं |
| मुआवजा |
कंज्यूमर कोर्ट (Consumer Court) में केस करें |
इस मामले में राणा हांडा और आदित्य मल्होत्रा जैसे निवेशकों ने याचिका दायर की थी। राणा हांडा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने 2021 में 14.22 लाख रुपये निवेश किए थे, लेकिन मई 2025 से उन्हें पैसे निकालने में दिक्कत आ रही थी।