Delhi HC का केंद्र सरकार को निर्देश, 3 महीने में तय करें पासपोर्ट फीस में बढ़ोतरी का मामला
Delhi: पासपोर्ट बनवाने की बढ़ी हुई फीस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) से कहा है कि वह फीस में बदलाव के खिलाफ दी गई अर्जी पर विचार करे और तीन महीने के भीतर
Delhi: पासपोर्ट बनवाने की बढ़ी हुई फीस को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) से कहा है कि वह फीस में बदलाव के खिलाफ दी गई अर्जी पर विचार करे और तीन महीने के भीतर इस पर अपना फैसला सुनाए। यह आदेश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया है।
यह मामला Pravasi Legal Cell द्वारा दायर किया गया था। कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने इस याचिका को निपटाते हुए सरकार को कानून के हिसाब से निर्णय लेने को कहा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि क्या बढ़ी हुई फीस वास्तव में बहुत ज्यादा है, क्योंकि महंगाई भी बढ़ रही है।
याचिकाकर्ता की तरफ से वकील एंटो रॉबर्ट ने दलील दी कि फीस में अचानक हुई बड़ी बढ़ोतरी से आम नागरिकों, खासकर प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने इस फीस वृद्धि के पीछे कोई पारदर्शी कारण या लागत का ब्यौरा नहीं दिया है। याचिका में दावा किया गया कि यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है, जो समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बात करते हैं।
पासपोर्ट फीस में हुए बदलावों की जानकारी नीचे दी गई है:
| पासपोर्ट का प्रकार | पुरानी फीस | नई फीस (1 जुलाई 2026 से) |
|---|---|---|
| भारतीय निवासियों के लिए (36 पेज) | ₹1,500 | ₹2,500 |
| विदेशी भारतीयों (Overseas Indians) के लिए | US $75 (लगभग ₹7,165) | US $125 (लगभग ₹11,942) |
बता दें कि विदेश मंत्रालय ने 20 जून 2026 को इस फीस वृद्धि की सूचना दी थी और नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो गए थे। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को एक अलग मामले में अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा जैसे देशों में पासपोर्ट और वीजा सेवाओं के आउटसोर्सिंग टेंडर को रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।