Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने औद्योगिक विवादों (Industrial Disputes) को सुलझाने के लिए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर किसी कर्मचारी और कंपनी के बीच विवाद होता है, तो यह तय करने के लिए कि मामला किस सरकार
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट ने औद्योगिक विवादों (Industrial Disputes) को सुलझाने के लिए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया है कि अगर किसी कर्मचारी और कंपनी के बीच विवाद होता है, तो यह तय करने के लिए कि मामला किस सरकार के पास जाएगा, नौकरी की जगह और नौकरी खत्म होने का फैसला कहां लागू हुआ, ये दो बातें सबसे जरूरी हैं।
सिर्फ ऑफिस होने से दिल्ली के लेबर अफसर नहीं ले पाएंगे फैसला
जस्टिस शैल जैन ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी कंपनी का ऑफिस दिल्ली में है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली के लेबर अधिकारियों को उस मामले में दखल देने का अधिकार मिल गया। कोर्ट ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तय करने के लिए यह देखना होगा कि कर्मचारी असल में काम कहां कर रहा था।
हरियाणा के मामले में दिल्ली सरकार को नहीं माना गया ‘उचित सरकार’
कोर्ट ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक याचिकाकर्ता फरीदाबाद, हरियाणा में काम करता था और उसे वहीं काम पर न आने का निर्देश मिला था। इस आधार पर कोर्ट ने माना कि विवाद हरियाणा के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए, औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत दिल्ली सरकार को इस मामले में ‘उचित सरकार’ (Appropriate Government) नहीं माना गया।
रिटायरमेंट के बाद भत्तों और निजीकरण पर भी आया फैसला
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिटायरमेंट के बाद यात्रा भत्ता (TA) और दैनिक भत्ता (DA) के नए दावों के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33C(2) लागू नहीं होगी। इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि इंडियन एयरलाइंस जैसी निजीकृत कंपनियों के खिलाफ भी औद्योगिक न्यायाधिकरण के अवार्ड को चुनौती देने वाली रिट याचिकाएं अनुच्छेद 226 और 227 के तहत सुनी जा सकती हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
औद्योगिक विवादों में ‘उचित सरकार’ का फैसला कैसे होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट के अनुसार, नौकरी का स्थान (situs of employment) और वह जगह जहां नौकरी खत्म करने का फैसला प्रभावी हुआ, इन दो कारकों से उचित सरकार की पहचान होगी।
क्या दिल्ली में ऑफिस होने पर मामला दिल्ली लेबर कोर्ट में जा सकता है?
नहीं, सिर्फ नियोक्ता का ऑफिस दिल्ली में होने से दिल्ली के लेबर अधिकारियों को अधिकार क्षेत्र नहीं मिलता, जब तक कि कर्मचारी वहां कार्यरत न हो।