Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पत्रकार Ravish Kumar और कई AAP न
Delhi: दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पत्रकार Ravish Kumar और कई AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि न्यायपालिका की छवि खराब करने के लिए वीडियो लीक करने वालों के खिलाफ SIT जांच होनी चाहिए।
किन लोगों के खिलाफ हुई अवमानना की शिकायत और क्या है आरोप
वकील वैभव सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की है। इसमें अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ रवीश कुमार, दिग्विजय सिंह, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, संजीव झा, पुरनदीप साहनी, जरनैल सिंह, मुकेश अहलावत और विनय मिश्रा का नाम शामिल है। आरोप है कि कोर्ट की अनुमति के बिना रिकॉर्डिंग की गई और उसे प्रसारित किया गया, जो कि नियमों का सीधा उल्लंघन है।
कोर्ट के नियम और वीडियो हटाने का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट के नियमों के मुताबिक बिना अनुमति के कोर्ट की कार्यवाही को रिकॉर्ड करना या साझा करना अवैध है। इस मामले में अदालत ने पहले ही कड़ा रुख अपनाया है:
- 15 अप्रैल 2026 को दिल्ली पुलिस को सभी वायरल वीडियो हटाने का निर्देश दिया गया था।
- कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि बिना अनुमति वीडियो साझा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
- 24 जनवरी 2023 को अधिसूचित नियमों के तहत लाइव स्ट्रीमिंग और रिकॉर्डिंग के लिए अनुमति अनिवार्य है।
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने क्यों खारिज की केजरीवाल की याचिका
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को इस मामले से हटाने (Recusal) की मांग की थी। केजरीवाल का तर्क था कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं, जिससे निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। जस्टिस शर्मा ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि अदालत धारणाओं पर नहीं चलती और न्यायाधीश अपनी योग्यता के आधार पर फैसला लेते हैं, न कि किसी पसंद या डर के आधार पर।