Delhi: छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और पुलिस बर्बरता मामले में हाई कोर्ट सख्त, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन के दौरान छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बरता के मामले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलि

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के आंदोलन के दौरान छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और पुलिस द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बरता के मामले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर 2026 को होगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने गंभीर आरोप लगाए। सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन और विकास सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बिना चेतावनी के निहत्थे लोगों को बेरहमी से पीटा। वकीलों ने कोर्ट को बताया कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ छेड़छाड़ की गई और लाठियों से उनके निजी अंगों पर हमला किया गया, जिसमें 90 से ज्यादा लोग घायल हुए। एडवोकेट गोपाल शंकरानारायणन ने एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा पर एक महिला पर हमला करने का आरोप लगाया।

कोर्ट ने इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने आदेश दिया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान के सभी CCTV फुटेज, वीडियोग्राफी और बॉडी कैमरा रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि इन रिकॉर्ड्स को डिलीट नहीं किया जाएगा और इन्हें सरकारी SOP के मुताबिक संभाल कर रखा जाए।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से एएसजी एसवी राजू ने इन याचिकाओं को ‘पब्लिक स्टंट’ बताया। सरकार का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था और उसमें हिंसा हुई थी। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस दौरान 170 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पत्थरबाजी और दंगा करने के आरोप में पांच FIR दर्ज की हैं। साथ ही सोनम वांगचुक की पत्नी पर हमले की खबरों को पुलिस ने पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।

अब हाई कोर्ट यह देखेगा कि क्या पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए और क्या इस पूरे मामले की SIT जांच की जरूरत है। याचिकाकर्ताओं ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।