Delhi HC का बड़ा फैसला, CBSE और JoSAA की तारीखों की गलती की सजा छात्र नहीं भुगतेंगे

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि CBSE और JoSAA के शेड्यूल में तालमेल न होने की वजह से छात्रों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, अगर

Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि CBSE और JoSAA के शेड्यूल में तालमेल न होने की वजह से छात्रों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, अगर नियम छात्रों को नंबर सुधारने का मौका देते हैं, तो वह मौका असल में काम का होना चाहिए, न कि सिर्फ कागजों पर।

यह पूरा मामला उन छात्रों से जुड़ा है जिन्होंने Class XII के नंबर सुधारने के लिए Improvement एग्जाम दिए थे। JoSAA ने संशोधित नंबर जमा करने की आखिरी तारीख 15 जुलाई 2026 तय की थी, जबकि CBSE की सुधार परीक्षा 28 जुलाई 2026 को होनी थी। इस वजह से छात्र अपने नए नंबर समय पर जमा नहीं कर पाए और उनकी एडमिशन प्रक्रिया में दिक्कत आई।

जस्टिस जसमीत सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि प्रीमियर संस्थानों में एडमिशन से छात्रों को सिर्फ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि दो संस्थाओं की तारीखें अलग-अलग हैं। उन्होंने साफ किया कि अगर सुधार परीक्षा का मौका दिया गया है, तो उसे प्रभावी होना चाहिए। अगर 15 जुलाई की डेडलाइन को ही अंतिम मान लिया गया, तो 28 जुलाई को परीक्षा देने वाले सभी छात्र अपने आप अयोग्य हो जाएंगे, जो कि गलत है।

इस मामले में JoSAA और संस्थानों की तरफ से सीनियर एडवोकेट अर्जुन मित्रा ने दलील दी कि सभी सीटें आवंटित हो चुकी हैं और संस्थान अपने ब्रोशर के खिलाफ नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि केवल सहानुभूति के आधार पर शैक्षणिक शेड्यूल में बदलाव नहीं किया जा सकता।

यह याचिका दक्ष सिंघल और पारस बत्रा नाम के दो छात्रों ने दायर की थी। दक्ष ST कैटेगरी से हैं और IIT Delhi में एडमिशन चाहते थे, जबकि पारस PwD कैटेगरी से हैं और उन्हें SPA Delhi में सीट मिली थी। मामूली नंबर कम होने के कारण उनका एडमिशन रद्द कर दिया गया था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।