Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना के सुर घाट इलाके में सभी तरह की धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जस्टिस जसमीत सिंह ने 12 मई 2026 को यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने साफ किया कि यह इलाका ‘Zone-O&
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने यमुना के सुर घाट इलाके में सभी तरह की धार्मिक और व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। जस्टिस जसमीत सिंह ने 12 मई 2026 को यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने साफ किया कि यह इलाका ‘Zone-O’ के तहत आता है और पर्यावरण के लिहाज से बहुत संवेदनशील है, इसलिए यहां किसी भी तरह की पार्किंग या दुकान चलाने की अनुमति नहीं होगी।
यमुना के तट पर क्या पाबंदियां लगाई गई हैं?
कोर्ट ने DDA को निर्देश दिया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सुर घाट के फ्लडप्लेन में कोई भी व्यावसायिक काम या धार्मिक गतिविधि न हो। इसमें गाड़ियों की पार्किंग करना भी शामिल है। अगर किसी खास मौके या त्योहार पर श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की जरूरत पड़ती है, तो DDA को इस संवेदनशील इलाके से दूर कहीं और वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
अवैध कब्जों और पार्किंग पर क्या हुआ फैसला?
कोर्ट ने सुरेश कुमार नाम के एक व्यक्ति की पार्किंग साइट बहाल करने की याचिका को खारिज कर दिया। वहीं, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने 7 और 9 मई 2026 को यमुना बाजार घाटों के पास अवैध बस्तियों को नोटिस जारी किए थे। DDMA ने बताया कि 2023 और 2025 में आई बाढ़ के दौरान इन अवैध कब्जों की वजह से जान-माल का भारी नुकसान हुआ था और राहत कार्यों में काफी दिक्कतें आईं थीं।
हाई कोर्ट के पिछले आदेश और नियम क्या हैं?
यमुना के तट को बचाने के लिए कोर्ट पहले भी कई आदेश दे चुका है। 19 जुलाई 2024 को सभी अनधिकृत ढांचों पर रोक लगाई गई थी, जबकि 31 दिसंबर 2025 को यहां किसी भी तरह के निवास या घर बनाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। MCD ने भी 31 जनवरी 2025 को सुर घाट पर पार्किंग के आवंटन को रद्द कर दिया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
सुर घाट पर किन चीजों की मनाही है?
दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशानुसार सुर घाट के Zone-O इलाके में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि, धार्मिक आयोजन और गाड़ियों की पार्किंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अवैध कब्जों को हटाने का नोटिस क्यों दिया गया?
DDMA ने नोटिस दिया क्योंकि 2023 और 2025 की बाढ़ में इन अवैध बस्तियों की वजह से जनजीवन प्रभावित हुआ था और सार्वजनिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ा था।