Delhi में पेड़ काटने की छूट पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार को अधिसूचना वापस लेने की चेतावनी
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शहर में पेड़ काटने की छूट देने वाली सरकारी अधिसूचना पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस आदेश को तुरंत वापस लेने के लिए कहा है, वरना अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। न्यायमूर
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने शहर में पेड़ काटने की छूट देने वाली सरकारी अधिसूचना पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस आदेश को तुरंत वापस लेने के लिए कहा है, वरना अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने इस अधिसूचना को भयानक बताते हुए सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है।
यह पूरा मामला जून 2025 में वन विभाग द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन से जुड़ा है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया था कि अगर कोई पेड़ जान, माल या ट्रैफिक के लिए खतरा बन रहा है, तो उसे तुरंत काटा जा सकता है और इसकी जानकारी 24 घंटे के भीतर ट्री ऑफिसर को दी जा सकती है। हाई कोर्ट का मानना है कि विकास के नाम पर बिना किसी सुरक्षा के पेड़ काटने की यह अनुमति गलत है और यह कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है।
अदालत ने टिप्पणी की कि वन विभाग ने कोर्ट के निर्देशों को मानने में लापरवाही दिखाई है। इससे पहले मई 2026 में भी कोर्ट ने ऐसी ही एक अधिसूचना पर रोक लगाई थी, जिसमें पेड़ों की छंटाई के लिए पूर्व अनुमति की शर्त हटा दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1994 (DPT Act) के तहत पेड़ काटने या हटाने के लिए ट्री ऑफिसर की पहले से मंजूरी लेना जरूरी है।
दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2026 में पेड़ों को बचाने के लिए एक नई SOP लागू की थी, जिसमें 24 घंटे कंट्रोल रूम और डिजिटल ट्रैकिंग की सुविधा दी गई है। वहीं, सरोजिनी नगर पुनर्विकास परियोजना के लिए NBCC को 1,049 पेड़ों को दूसरी जगह लगाने और 42 पेड़ों को काटने की अनुमति मिली है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने भी पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह लगाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसमें पारदर्शिता की मांग की है।