Delhi: पहलवान Vinesh Phogat को एक बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो मातृत्व अवकाश जैसे कारणों से
Delhi: पहलवान Vinesh Phogat को एक बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो मातृत्व अवकाश जैसे कारणों से खेल से ब्रेक लेते हैं। कोर्ट ने इस मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
ट्रायल की तारीखें और कोर्ट का आदेश क्या है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 मई, 2026 को यह फैसला सुनाया था, जिसे शनिवार, 23 मई को वेबसाइट पर अपलोड किया गया। अब Vinesh Phogat 30 और 31 मई, 2026 को होने वाले एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग ले सकेंगी। इससे पहले 18 मई को एक सिंगल जज बेंच ने उन्हें तुरंत राहत देने से मना कर दिया था, लेकिन अब कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया है।
WFI की चयन नीति को क्यों बताया गया भेदभावपूर्ण?
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने नियम बनाया था कि केवल हालिया चैंपियनशिप के पदक विजेता ही ट्रायल में हिस्सा ले पाएंगे। कोर्ट ने इस नीति को भेदभावपूर्ण और बहिष्कृत बताया। अदालत ने कहा कि ऐसी नीति में मातृत्व अवकाश लेने वाली प्रतिष्ठित खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं थी। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस देश में मातृत्व को मनाया जाता है और इसे करियर में बाधा नहीं बनाना चाहिए।
ट्रायल की निगरानी और WFI पर टिप्पणी
कोर्ट ने आदेश दिया है कि चयन ट्रायल की पूरी वीडियोग्राफी होगी। साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) से दो स्वतंत्र पर्यवेक्षक वहां मौजूद रहेंगे ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। कोर्ट ने WFI द्वारा विनेश को भेजे गए कारण बताओ नोटिस को प्रतिशोधी और दुर्भावनापूर्ण बताया। अदालत ने जिक्र किया कि Court of Arbitration for Sport ने पेरिस ओलंपिक मामले में विनेश के खिलाफ कोई गलत काम नहीं पाया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
विनेश फोगाट कब और कहाँ ट्रायल में हिस्सा लेंगी?
विनेश फोगाट 30 और 31 मई, 2026 को होने वाले एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेंगी, जिसकी मंजूरी दिल्ली हाईकोर्ट ने दी है।
अदालत ने WFI की नीति पर क्या टिप्पणी की?
कोर्ट ने WFI की चयन नीति को भेदभावपूर्ण बताया क्योंकि इसमें मातृत्व अवकाश लेने वाले खिलाड़ियों का प्रावधान नहीं था और महासंघ के आचरण को प्रतिशोधी करार दिया।