Delhi: राजधानी दिल्ली में इन दिनों झुलसाती गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे आम जनता के साथ-साथ मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है। कंस्ट्रक्शन वर्कर, रिक्श
Delhi: राजधानी दिल्ली में इन दिनों झुलसाती गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे आम जनता के साथ-साथ मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित है। कंस्ट्रक्शन वर्कर, रिक्शा चालक और गिग वर्कर्स तपती धूप में काम करने को मजबूर हैं, वहीं शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत देखी जा रही है।
मजदूरों के लिए सरकार ने क्या नियम बनाए हैं?
Delhi सरकार ने Heat Wave Action Plan 2026 लागू किया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने निर्देश दिए हैं कि दोपहर 1 बजे से 4 बजे के बीच मजदूरों को कड़ी धूप में काम न कराया जाए। Labour Ministry ने भी आदेश दिया है कि नियोक्ताओं को मजदूरों के लिए पीने के पानी, छायादार आराम करने की जगह और स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजाम करना होगा। इसके अलावा, सरकार ने महिला मजदूरों के लिए 500 ‘पलना’ केंद्र और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर 3,000 वाटर कियोस्क लगाने की योजना बनाई है।
ग्राउंड रिपोर्ट में क्या सामने आया है?
Aaj Tak की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूर अपनी दिहाड़ी बचाने के लिए भीषण गर्मी में भी काम कर रहे हैं। दक्षिण दिल्ली के दक्षिणपुरी जैसे इलाकों में पानी का संकट इतना गहरा है कि घरेलू कामगारों को अपने मालिकों से नहाने के लिए अनुमति मांगनी पड़ रही है। कई मजदूर अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा पानी खरीदने में खर्च कर रहे हैं। गिग वर्कर्स भी इस गर्मी में डिलीवरी कर रहे हैं, जिससे उन्हें बुखार और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो रही हैं।
डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स ने क्या चेतावनी दी है?
Artemis Hospitals की सीनियर कंसल्टेंट Seema Dhir ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में लंबे समय तक काम करने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो जानलेवा हो सकता है। IMD ने लोगों को हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और सिर ढककर रखने की सलाह दी है। वहीं, GIPSWU के निर्मल गोराना का कहना है कि सिर्फ एडवाइजरी काफी नहीं है, बल्कि लेबर कोड में सख्त नियमों की जरूरत है ताकि मजदूरों को सुरक्षा मिल सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली सरकार ने हीटवेव से बचने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने Heat Wave Action Plan 2026 लागू किया है, जिसके तहत दोपहर 1 से 4 बजे तक काम पर रोक लगाने, 3,000 वाटर कियोस्क लगाने और महिला मजदूरों के लिए 500 पलना केंद्र बनाने का निर्देश दिया है।
भीषण गर्मी में काम करने वाले मजदूरों को किन स्वास्थ्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार मजदूरों में डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं, जो गंभीर स्थिति में जानलेवा हो सकते हैं।