Finance : Reliance Power Ltd के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला Solar Energy Corporation of India (SECI) को दिए गए करोड़ों रुपये के फर्जी बैंक गारं
Finance : Reliance Power Ltd के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला Solar Energy Corporation of India (SECI) को दिए गए करोड़ों रुपये के फर्जी बैंक गारंटी से जुड़ा है। कोर्ट अब बुधवार, 10 जून 2026 को अपना अंतिम आदेश सुनाएगा। अशोक कुमार पाल 10 अक्टूबर 2025 से जेल में बंद हैं।
क्या है पूरा मामला और क्यों हुई गिरफ्तारी?
यह पूरा मामला 24 जून 2025 को SECI के मैनेजर बिलेश मीणा की एक शिकायत से शुरू हुआ था। आरोप है कि Reliance NU BESS Ltd के जरिए 136 करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्जी बैंक गारंटी जमा की गई थी। इसमें दो अलग-अलग गारंटी थीं, जिनमें से हर एक 68.20 करोड़ रुपये की थी। ये गारंटी मलेशिया के ACE Investment Bank और फिलीपींस के FirstRand Bank Ltd के नाम पर बनाई गई थीं। जांच में पता चला कि SBI के नाम पर फर्जी ईमेल और मैसेज भेजे गए थे, जिसे बाद में बैंक ने गलत बताया।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं और अब तक क्या हुआ?
अशोक कुमार पाल के वकील ने दलील दी कि वह पिछले आठ महीने से जेल में हैं और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए व्यक्तिगत आजादी की मांग की। वहीं, ED के वकील ज़ोहेब हुसैन ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया। इससे पहले 11 मार्च 2026 को ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इस केस में EOW ने पार्थ सारथी बिस्वाल और अमरनाथ दत्ता को भी गिरफ्तार किया है।
कंपनी का पक्ष और शेयरों पर असर
Reliance Power ने इस मामले में खुद को पीड़ित बताया है और कहा कि यह धोखाधड़ी और साजिश का नतीजा है। जब अक्टूबर 2025 में अशोक कुमार पाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब रिलायंस ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई थी। उस समय Reliance Power के शेयर 5% से ज्यादा टूट गए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अशोक कुमार पाल पर क्या आरोप लगे हैं?
उन पर SECI को 136 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी देने और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप है, जिसमें विदेशी बैंकों के नाम का इस्तेमाल किया गया था।
इस मामले की जांच कौन सी एजेंसियां कर रही हैं?
दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने BNS और IT एक्ट के तहत केस दर्ज किया है, जबकि Enforcement Directorate (ED) PMLA एक्ट के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।