Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड (Sentence Review Board) के काम करने के तरीके को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 22 साल से अधिक समय से जेल में बंद उम्रकैद के कैदी रजब अली (Rajab Ali) क
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड (Sentence Review Board) के काम करने के तरीके को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 22 साल से अधिक समय से जेल में बंद उम्रकैद के कैदी रजब अली (Rajab Ali) को तुरंत रिहा किया जाए। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने बोर्ड के फैसलों को अलोकतांत्रिक और मनमाना करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड ने कैदी के जेल में व्यवहार और उसमें आए सुधार की पूरी तरह अनदेखी की है।
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कैदी की रिहाई पर अदालत ने क्या कहा?
रजब अली ने 22 साल की वास्तविक सजा काट ली है और अगर छूट को भी जोड़ लिया जाए तो यह अवधि 28 साल से ज्यादा हो जाती है। वह तिहाड़ जेल की अर्ध-खुली जेल (Semi-open prison) में था और वहां उसका व्यवहार बहुत अच्छा रहा था। बोर्ड ने 2016 से 2024 के बीच कई बार उसकी रिहाई की अपील को ठुकराया था। अदालत ने कहा कि किसी कैदी को सिर्फ इसलिए रिहा न करना कि उसका जुर्म गंभीर था, सही नहीं है। बोर्ड को यह भी देखना चाहिए कि क्या वह अब समाज के लिए खतरा है या नहीं।
सजा समीक्षा बोर्ड की खामियों पर कोर्ट की टिप्पणी
- मैकेनिकल फैसले: कोर्ट ने पाया कि बोर्ड बिना सोचे-समझे एक ही जैसे पुराने पैटर्न पर रिहाई की अर्जी खारिज कर रहा था।
- जल्दबाजी में काम: बोर्ड एक ही मीटिंग में 100 से ज्यादा मामलों पर चर्चा करता है, जिससे यह समझना मुश्किल है कि प्रत्येक केस पर गंभीरता से ध्यान दिया गया होगा।
- नियमों की अनदेखी: बोर्ड ने दिल्ली जेल नियम 2018 और 2004 की समय से पहले रिहाई की नीति का पालन नहीं किया।
- अधिकारियों की राय: चीफ प्रोबेशन ऑफिसर ने रजब अली की रिहाई के लिए सकारात्मक रिपोर्ट दी थी, लेकिन बोर्ड ने इसे भी नजरअंदाज कर दिया।
| मुख्य जानकारी |
तथ्य |
| कैदी का नाम |
रजब अली |
| जेल में बिताया समय |
22 साल (वास्तविक) |
| हाई कोर्ट का फैसला |
7 अप्रैल 2026 |
| संबंधित जेल |
तिहाड़ सेंट्रल जेल |