Delhi HC में फर्जी यूनिवर्सिटी पर सुनवाई, AICTE ने कहा- नकली संस्थानों को रोकने के लिए बनाया है मजबूत सिस्टम
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में फर्जी यूनिवर्सिटीज के खिलाफ चल रही एक जनहित याचिका (PIL) पर AICTE ने अपना जवाब दाखिल किया है। AICTE ने कोर्ट को बताया है कि देश में बिना मान्यता वाले तकनीकी संस्थानों की भीड़ को रोकने के लिए उ
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में फर्जी यूनिवर्सिटीज के खिलाफ चल रही एक जनहित याचिका (PIL) पर AICTE ने अपना जवाब दाखिल किया है। AICTE ने कोर्ट को बताया है कि देश में बिना मान्यता वाले तकनीकी संस्थानों की भीड़ को रोकने के लिए उसने एक पूरा कानूनी और रेगुलेटरी ढांचा तैयार किया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि छात्र फर्जी डिग्री के जाल में फंसने से बच सकें।
AICTE की डायरेक्टर डॉ. नीतू भगत ने कोर्ट में दिए गए हलफनामे में कहा कि वे नियमित रूप से मान्यता प्राप्त और बिना मान्यता वाले संस्थानों की लिस्ट जारी करते हैं। एडमिशन सेशन शुरू होने से पहले जनता के लिए एडवाइजरी भी जारी की जाती है ताकि लोग सतर्क रहें। इसके अलावा, जो संस्थान बिना मंजूरी के काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
अदालत ने इस मामले को काफी गंभीर माना है। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि छोटे शहरों के छात्र अक्सर इन फर्जी संस्थानों में एडमिशन ले लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि उनकी डिग्री मान्य नहीं है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने भी कोर्ट को बताया कि कुछ फर्जी यूनिवर्सिटीज तो कानून, मेडिसिन और वोकेशनल स्टडीज जैसे कोर्स भी ऑफर कर रही हैं, जो काफी चिंताजनक है।
AICTE ने साफ किया कि वह 1987 के एक्ट के तहत एक वैधानिक संस्था है और उसके पास तकनीकी शिक्षा को रेगुलेट करने की पूरी शक्ति है। इसके लिए ‘अप्रूवल प्रोसेस रेगुलेशन’ और ‘अप्रूवल प्रोसेस हैंडबुक’ बनाई गई है, जिसमें नए कोर्स और संस्थानों के लिए जरूरी नियमों की पूरी जानकारी दी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी।