Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) को उन 17 अभ्यर्थियों को नौकरी देने का आदेश दिया है, जिनकी उम्मीदवारी ई-ड
Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) को उन 17 अभ्यर्थियों को नौकरी देने का आदेश दिया है, जिनकी उम्मीदवारी ई-डॉसियर भरने में हुई देरी की वजह से रद्द कर दी गई थी। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने साफ कहा कि इस देरी के लिए उम्मीदवार नहीं बल्कि खुद बोर्ड जिम्मेदार है क्योंकि उसने सूचना देने में लापरवाही बरती थी।
अदालत ने बोर्ड की दलीलों को क्यों नकारा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रभावी संचार के सिद्धांत पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि बोर्ड की यह दलील गलत है कि उम्मीदवारों को खुद वेबसाइट चेक करते रहना चाहिए। बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह उम्मीदवारों को SMS और ईमेल जैसे सभी माध्यमों से जानकारी दे। अदालत ने माना कि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर न्याय के सामान्य नियमों को नहीं बदला जा सकता और उम्मीदवारों को सूचना मिलने की पूरी उम्मीद रखने का हक है।
- कोर्ट ने 21 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उम्मीदवारों को राहत दी है
- बोर्ड यह साबित करने में नाकाम रहा कि उसने उम्मीदवारों को समय पर मैसेज भेजे थे
- अंतिम समय में उम्मीदवारी रद्द करने से छात्रों के करियर पर बुरा असर पड़ता है
- भर्ती सिस्टम में होने वाली गलतियों का खामियाजा अभ्यर्थी नहीं भुगतेंगे
ई-डॉसियर और तकनीकी समस्या से जुड़े नए नियम
DSSSB ने हाल के नोटिसों में ई-डॉसियर अपलोड करने के नियमों को कड़ा किया है। फरवरी 2026 में जारी एक सूचना के मुताबिक, यदि किसी उम्मीदवार को दस्तावेज अपलोड करने में तकनीकी दिक्कत आती है, तो उसे 48 घंटे के भीतर बोर्ड को सूचित करना होता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संचार की पूरी जिम्मेदारी राज्य यानी चयन बोर्ड की होती है। भर्ती के दौरान अगर सूचना देने में कोई कमी रहती है, तो उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।
| खास जानकारी |
हाईकोर्ट का फैसला/बोर्ड का नियम |
| सूचना का माध्यम |
SMS, ईमेल और वेबसाइट तीनों जरूरी हैं |
| देरी की जिम्मेदारी |
प्रभावी संचार न होने पर बोर्ड जिम्मेदार होगा |
| टेक्निकल समस्या |
दिक्कत आने पर 48 घंटे में रिपोर्ट करना होगा |
| नियुक्ति का समय |
अदालत ने कुछ मामलों में 2 महीने में नियुक्ति के निर्देश दिए हैं |
यह फैसला उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए काफी अहम है जो दिल्ली के अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी का सपना देख रहे हैं। कोर्ट के इस रुख से भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आने और तकनीकी गलतियों की वजह से छात्रों के नुकसान में कमी आने की संभावना है।