Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए एक भारतीय सेना के जवान के स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित रखने (cryopreservation) की अनुमति दे दी है। यह जवान लंबे समय से कोमा जैसी स्थिति (persistent vegetative state)
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए एक भारतीय सेना के जवान के स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित रखने (cryopreservation) की अनुमति दे दी है। यह जवान लंबे समय से कोमा जैसी स्थिति (persistent vegetative state) में है। कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ नई लिखित सहमति न होने की वजह से इस प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट ने सहमति को लेकर क्या कहा?
जस्टिस पुरुषिंद्र कुमार कौरव ने 13 अप्रैल 2026 को यह आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि जवान ने पहले अपनी पत्नी के साथ IVF इलाज के लिए सहमति दी थी, इसलिए उसे कानूनन सही माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि Assisted Reproductive Technology (ART) Act, 2021 के तहत नई लिखित सहमति की कमी के कारण इस प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता। जस्टिस कौरव ने कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मातृत्व का अधिकार और प्रजनन स्वायत्तता बुनियादी अधिकार हैं, जिन्हें कागजी औपचारिकताओं की वजह से नहीं छीना जा सकता।
मामला क्या था और मेडिकल बोर्ड की क्या राय है?
यह मामला जुलाई 2025 का है जब जम्मू और कश्मीर में तैनाती के दौरान जवान के सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद वह कोमा में चले गए। उनकी पत्नी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में Army Hospital (R&R), दिल्ली कैंट द्वारा बनाए गए मेडिकल बोर्ड ने कुछ जरूरी बातें बताईं:
- स्पर्म निकालना तकनीकी रूप से संभव है।
- हालांकि, viable स्पर्म (उपयोगी शुक्राणु) मिलने की संभावना बहुत कम या न्यूनतम है।
मुख्य जानकारी एक नजर में
| विवरण |
जानकारी |
| कोर्ट का आदेश |
13 अप्रैल 2026 |
| घटना का समय |
जुलाई 2025 (Jammu & Kashmir तैनाती) |
| संबंधित कानून |
ART Act, 2021 और संविधान का आर्टिकल 21 |
| अस्पताल |
Army Hospital (R&R), दिल्ली कैंट |