Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में एक 29 साल की शादीशुदा महिला ने अपने 28 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की अनुमति मांगी थी। इस मामले में एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। डॉक्टरों ने अदालत को साफ तौर पर बताय
Delhi: दिल्ली हाई कोर्ट में एक 29 साल की शादीशुदा महिला ने अपने 28 हफ्ते के गर्भ को खत्म करने की अनुमति मांगी थी। इस मामले में एम्स (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। डॉक्टरों ने अदालत को साफ तौर पर बताया है कि इस स्तर पर गर्भपात करना महिला की सेहत और जान के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है।
एम्स के मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट में क्या जानकारी दी है?
एम्स के डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद बताया कि भ्रूण में ‘गंभीर इंट्राब्यूटेराइन ग्रोथ रिस्ट्रिक्शन’ (IUGR) की समस्या है। इसका मतलब है कि गर्भ में बच्चे का विकास ठीक से नहीं हो रहा है। हालांकि, जांच में बच्चे के अंदर कोई भी जेनेटिक बीमारी या असामान्यता नहीं मिली है। बोर्ड का मानना है कि 28 हफ्ते का समय काफी ज्यादा हो चुका है और इस वक्त प्रेग्नेंसी खत्म करना मां के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इससे पहले राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल की रिपोर्ट आई थी, जिससे कोर्ट संतुष्ट नहीं था, जिसके बाद एम्स को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी।
भारत में गर्भपात को लेकर क्या हैं कानूनी नियम?
भारत के मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट 1971 के हिसाब से गर्भपात के लिए कुछ कड़े नियम बनाए गए हैं। इन नियमों को समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है:
- 20 हफ्ते की सीमा: सामान्य तौर पर 20 हफ्ते तक के गर्भ को खत्म करने की अनुमति दी जाती है।
- 2021 का संशोधन: नए नियमों के तहत अब विशेष परिस्थितियों में 24 हफ्ते तक गर्भपात की इजाजत मिल सकती है।
- 24 हफ्ते से ज्यादा: अगर गर्भ 24 हफ्ते से ज्यादा का है, तो केवल भ्रूण में गंभीर विकृति होने पर ही मेडिकल बोर्ड की सलाह पर कोर्ट अनुमति दे सकता है।
- मेडिकल बोर्ड की भूमिका: ऐसे सभी मामलों में सरकार द्वारा नियुक्त मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सबसे अहम होती है, जिसे कोर्ट आधार मानता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
एम्स के डॉक्टरों ने गर्भपात के लिए मना क्यों किया?
एम्स के मेडिकल बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि 28 हफ्ते के गर्भ को गिराने से मां की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, इसलिए उन्होंने इसे न करने की सलाह दी है।
क्या बच्चे में कोई जेनेटिक बीमारी पाई गई है?
रिपोर्ट के अनुसार भ्रूण में विकास की कमी (IUGR) तो है, लेकिन उसमें कोई जेनेटिक खराबी या बीमारी नहीं मिली है।