Delhi: देश के सबसे रसूखदार क्लबों में शुमार Delhi Gymkhana Club इन दिनों विवादों में है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्लब के रिकॉर्ड्स में कई ऐसी गड़बड़ियां मिली हैं जो हैरान करने वाली हैं। इसमें मरे हुए सद
Delhi: देश के सबसे रसूखदार क्लबों में शुमार Delhi Gymkhana Club इन दिनों विवादों में है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्लब के रिकॉर्ड्स में कई ऐसी गड़बड़ियां मिली हैं जो हैरान करने वाली हैं। इसमें मरे हुए सदस्यों के नाम पर डाइनिंग, वीआईपी जोन में ड्रोन उड़ाना और करोड़ों रुपये कानूनी लड़ाइयों में खर्च करने जैसे मामले सामने आए हैं।
क्लब में क्या-क्या गड़बड़ियां मिली हैं?
क्लब के रिकॉर्ड्स की जांच में पता चला है कि जिन सदस्यों की मौत हो चुकी है, उनके नाम पर भी खाने-पीने का हिसाब दिखाया गया। इसके अलावा सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वीआईपी जोन के ऊपर ड्रोन उड़ाया गया। क्लब ने पिछले 5 सालों में कानूनी खर्चों पर करीब 9 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें से अकेले साल 2022-23 में दो लॉ फर्म्स को 1.86 करोड़ रुपये दिए गए।
सरकार ने क्यों दिया खाली करने का नोटिस?
Ministry of Housing and Urban Affairs के Land & Development Office (L&DO) ने क्लब को 5 जून 2026 तक जगह खाली करने का आदेश दिया था। सरकार का कहना है कि क्लब ने खेल और मनोरंजन के अपने असली मकसद को छोड़ दिया है। यह जमीन प्रधानमंत्री आवास के पास है, इसलिए सुरक्षा और रक्षा बुनियादी ढांचे के लिए इसे वापस लेना जरूरी है। साथ ही, सरकार ने ‘वेस्टर्न स्टाइल एलीटिज्म’ को रोकने और वित्तीय कुप्रबंधन को भी वजह बताया है।
किराए और पैसों का क्या हिसाब है?
| विवरण |
राशि / जानकारी |
| कुल बकाया ग्राउंड रेंट |
करीब 47.59 करोड़ रुपये |
| पुराना वार्षिक किराया |
409.50 रुपये |
| नया वार्षिक किराया (2023) |
4.10 करोड़ रुपये से ज्यादा |
| 5 साल का कानूनी खर्च |
लगभग 9 करोड़ रुपये |
| 2022-23 का कानूनी खर्च |
2 करोड़ रुपये से ज्यादा |
क्लब के सदस्य ऑडिटेड अकाउंट्स को मंजूरी देने से मना कर रहे हैं। वहीं, सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासन अभी तक फोरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट जारी नहीं की है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी भी बेदखली की प्रक्रिया कानूनी नोटिस और सही प्रक्रिया के बाद ही होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Delhi Gymkhana Club को खाली करने का आदेश क्यों दिया गया?
सरकार के मुताबिक यह जमीन रक्षा और सुरक्षा बुनियादी ढांचे के लिए जरूरी है। साथ ही क्लब पर खेल के मकसद से भटकने और भारी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं।
क्लब के कानूनी खर्चों पर कितना पैसा बर्बाद हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों में करीब 9 करोड़ रुपये कानूनी फीस में खर्च हुए, जिसमें से 2022-23 के दौरान 2 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए।