Delhi: दिल्ली के मशहूर Delhi Gymkhana Club को खाली कराने के केंद्र सरकार के फैसले ने एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने क्लब को अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई
Delhi: दिल्ली के मशहूर Delhi Gymkhana Club को खाली कराने के केंद्र सरकार के फैसले ने एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने क्लब को अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का आदेश दिया है, जिसे अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। क्लब के सदस्यों और करीब 600 कर्मचारियों ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और कानूनी लड़ाई के लिए सीनियर वकील Abhishek Manu Singhvi को नियुक्त किया है।
सरकार ने क्यों दिया क्लब को खाली करने का आदेश?
Land and Development Office (L&DO) ने 22 मई 2026 को यह आदेश जारी किया था। सरकार का कहना है कि यह इलाका बेहद संवेदनशील और रणनीतिक है, इसलिए यहां डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक सिक्योरिटी के कामों को मजबूत करना जरूरी है। सरकार ने लीज डीड के क्लॉज 4 का हवाला देते हुए कहा है कि सार्वजनिक हित में यह जमीन वापस ली जा रही है। क्लब को 5 जून 2026 तक कब्जा सौंपने को कहा गया है।
हाईकोर्ट में क्या होगी कानूनी लड़ाई?
क्लब की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं। एक याचिका क्लब के स्थाई सदस्यों की ओर से होगी और दूसरी याचिका वहां काम करने वाले 600 कर्मचारियों की तरफ से होगी। सीनियर एडवोकेट Abhishek Manu Singhvi ने जस्टिस Avneesh Jhingan के सामने मामला रखा, जिसके बाद कोर्ट ने 26 मई 2026 को इस मामले की अर्जेंट सुनवाई तय की है।
अगर क्लब ने जगह खाली नहीं की तो क्या होगा?
सरकारी आदेश के मुताबिक, अगर 5 जून तक कब्जा नहीं सौंपा गया, तो कानून के मुताबिक जमीन वापस ले ली जाएगी। इस प्रक्रिया के लिए दिल्ली पुलिस को सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, क्लब के ऑफिसिएटिंग सेक्रेटरी Rajesh Bhatnagar ने L&DO को पत्र लिखकर इस आदेश पर स्पष्टता मांगी है और हाउसिंग मिनिस्ट्री के अधिकारियों के साथ मीटिंग की मांग की है ताकि क्लब का कामकाज प्रभावित न हो।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली जिमखाना क्लब को कब तक खाली करने का समय मिला है?
L&DO द्वारा जारी आदेश के अनुसार, क्लब को 5 जून 2026 तक अपनी 27.3 एकड़ की जमीन का शांतिपूर्ण कब्जा सरकार को सौंपना होगा।
सरकार इस जमीन को वापस क्यों लेना चाहती है?
सरकार का कहना है कि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है और डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए इस जमीन की तत्काल आवश्यकता है।