Delhi: राजधानी के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को एक बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने क्लब को सफदरजंग रोड स्थित उसकी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का नोटिस भेजा है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा बु
Delhi: राजधानी के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को एक बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने क्लब को सफदरजंग रोड स्थित उसकी 27.3 एकड़ जमीन खाली करने का नोटिस भेजा है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जरूरी बताया है। क्लब को 5 जून 2026 तक यह जगह खाली कर शांतिपूर्ण कब्जा सौंपना होगा।
सरकार ने जमीन खाली करने का आदेश क्यों दिया?
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) ने यह आदेश जारी किया है। सरकार का कहना है कि यह इलाका रणनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है। यहाँ रक्षा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए जमीन की सख्त जरूरत है। यह आदेश राष्ट्रपति के अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए पट्टे के खंड 4 के तहत दिया गया है, जो सार्वजनिक हित के लिए जमीन वापस लेने की अनुमति देता है।
क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
दिल्ली जिमखाना क्लब 1913 से चल रहा है और इसके करीब 11,000 से 14,000 सदस्य हैं, जिनमें बड़े अधिकारी, राजनयिक और पूर्व सैनिक शामिल हैं। इस फैसले से क्लब के करीब 600 कर्मचारियों के भविष्य पर भी संकट मंडरा रहा है। क्लब के सदस्यों में इस आदेश को लेकर काफी हैरानी और दुख है। कई सदस्य अब इस बेदखली को रोकने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए हस्ताक्षर भी जुटाए जा रहे हैं।
राजनीतिक बयानबाजी और क्लब का अगला कदम
इस मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है। शिवसेना नेता डॉ. अभिषेक वर्मा ने इसे एक जरूरी सुधार बताया, जबकि कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि यह जमीन प्रधानमंत्री आवास के विस्तार के लिए ली जा रही है। वहीं भाजपा नेता अमित मालवीय ने इन आरोपों को गलत बताया है। दूसरी ओर, क्लब के कार्यवाहक सचिव ने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मीटिंग मांगी है ताकि इस मुद्दे पर स्पष्टता मिल सके और क्लब का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली जिमखाना क्लब को जमीन खाली करने के लिए कितना समय मिला है?
क्लब को 22 मई 2026 को नोटिस मिला है और उसे 5 जून 2026 तक अपनी 27.3 एकड़ जमीन खाली कर सरकार को सौंपनी होगी।
सरकार ने जमीन वापस लेने का क्या कारण बताया है?
सरकार के अनुसार यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील और रणनीतिक है, इसलिए रक्षा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह जमीन जरूरी है।