Delhi-Gurugram में बारिश के बाद सड़कें क्यों बनती हैं नदियां, Urban Planner ने बताई प्लानिंग की बड़ी गलतियां

Haryana/Delhi: दिल्ली और गुरुग्राम में हर साल मानसून की पहली बारिश के साथ ही सड़कें तालाब बन जाती हैं। लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं और कई बार तो घर और बेसमेंट में पानी भर जाता है। Property Se Fayda के एक खास एपिसोड मे

Haryana/Delhi: दिल्ली और गुरुग्राम में हर साल मानसून की पहली बारिश के साथ ही सड़कें तालाब बन जाती हैं। लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं और कई बार तो घर और बेसमेंट में पानी भर जाता है। Property Se Fayda के एक खास एपिसोड में Urban Planner और Architect Dr. Suptendu P. Biswas ने बताया कि यह सिर्फ भारी बारिश की वजह से नहीं, बल्कि शहर की खराब प्लानिंग का नतीजा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गुरुग्राम के विकास के दौरान कई बड़ी गलतियां हुईं। शहर का विस्तार उन इलाकों में किया गया जो निचले हिस्से थे और जहां पहले से पानी भरने का खतरा था। प्राकृतिक जल सोखने वाले इलाके जैसे वेटलैंड्स और जोहड़ खत्म कर दिए गए और उनकी जगह कंक्रीट के ढांचे खड़े कर दिए गए। अरावली की पहाड़ियों और प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण होने से पानी के निकलने का रास्ता बंद हो गया है। उदाहरण के लिए, बादशाहपुर नाला शहर का मुख्य ड्रेनेज चैनल है, लेकिन उस पर हुए निर्माण ने समस्या को और बढ़ा दिया है।

हाल ही में 8 जुलाई 2026 को गुरुग्राम में करीब 80 mm बारिश हुई, जिससे पूरे शहर में जलभराव हो गया। नेशनल हाईवे-48 का एक हिस्सा नरसिंहपुर के पास धंस गया, जिससे भारी ट्रैफिक जाम लगा। हालात इतने खराब थे कि अधिकारियों ने कॉर्पोरेट ऑफिसों के लिए वर्क-from-होम एडवाइजरी जारी कर दी ताकि लोग घरों से काम कर सकें।

इस समस्या से निपटने के लिए Gurugram Metropolitan Development Authority (GMDA) ने कुछ कदम उठाए हैं। GMDA ने 105 करोड़ रुपये की लागत से 4.3 किलोमीटर लंबा Leg-4 स्टॉर्म वाटर ड्रेन चालू किया है, ताकि बादशाहपुर नाले का बोझ कम हो सके। इसके अलावा हीरो होंडा चौक और उमंग भारद्वाज चौक के बीच ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए नए वाटर शूट्स लगाए गए हैं।

घर खरीदने वालों के लिए विशेषज्ञों ने कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं। फ्लैट या मकान खरीदने से पहले उस इलाके के जलभराव के इतिहास की जांच जरूर करें। बेसमेंट वाले घर काफी रिस्की हो सकते हैं क्योंकि वहां पानी भरने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। खरीदारों को यह देखना चाहिए कि सोसाइटी में बैकअप पंप और रेनवाटर हार्वेस्टिंग की क्या व्यवस्था है और डेवलपर का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड कैसा रहा है।