Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी में शराब की रिटेल दुकानें चलाने वाली चार सरकारी संस्थाओं के पिछले 5 साल के खातों की जांच यानी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व वाले Finance विभाग ने पाया कि लं
Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी में शराब की रिटेल दुकानें चलाने वाली चार सरकारी संस्थाओं के पिछले 5 साल के खातों की जांच यानी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta के नेतृत्व वाले Finance विभाग ने पाया कि लंबे समय से खातों का मिलान नहीं हुआ है, जिससे पैसों की हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ गई है।
ऑडिट की जरूरत क्यों पड़ी और क्या है मामला?
दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने पाया कि शराब बेचने वाली संस्थाओं के अकाउंट्स में काफी समय से तालमेल नहीं था। इसी वजह से अब पूरे 5 साल के रिकॉर्ड की जांच होगी। इससे पहले CAG ने भी अपनी रिपोर्ट में शराब की सप्लाई और नियमन में 2,026.91 करोड़ रुपये के नुकसान का संकेत दिया था। विधानसभा स्पीकर Vijender Gupta ने लाइसेंस और कीमतों में खामियों को लेकर सवाल उठाए थे।
PAC रिपोर्ट में कितना नुकसान सामने आया?
Public Accounts Committee (PAC) ने 24 मार्च 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया कि शराब दुकानों की दोबारा टेंडरिंग न होने की वजह से करीब 890 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही, Excise Policy 2021-22 के तहत 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ करने पर भी सवाल उठे हैं।
शराब विभाग की कमाई और मौजूदा नियम क्या हैं?
वर्तमान में दिल्ली में सिर्फ सरकारी शराब दुकानें ही चल रही हैं और पुरानी व्यवस्था को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। राजस्व के मोर्चे पर विभाग ने कुछ बढ़त दर्ज की है, जिसका विवरण नीचे दिया गया है:
| विवरण |
जानकारी |
| अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की कमाई |
6,300 करोड़ रुपये |
| राजस्व वृद्धि |
10.5% |
| वर्तमान वित्तीय वर्ष का लक्ष्य |
7,200 करोड़ रुपये |
| ऑडिट की अवधि |
5 साल |