Delhi में यमुना के किनारे बनेगी 4.7 किलोमीटर लंबी दीवार, बाढ़ से बचने के लिए IIT Delhi तैयार करेगा प्लान

Delhi: राजधानी दिल्ली को हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। यमुना किनारे करीब 4.7 किलोमीटर लंबी एक सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी, ताकि रिहायशी इलाकों और सड़कों पर पानी न भरे।

Delhi: राजधानी दिल्ली को हर साल आने वाली बाढ़ की समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। यमुना किनारे करीब 4.7 किलोमीटर लंबी एक सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी, ताकि रिहायशी इलाकों और सड़कों पर पानी न भरे। इस पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइन और स्टडी IIT Delhi करेगा, जिससे बाढ़ का एक स्थायी समाधान निकल सके।

सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मंत्री Pravesh Sahib Singh ने बताया कि IIT Delhi इस नई दीवार के लिए जरूरी स्टडी करेगा। यह दीवार मजनू का टीला से पुराने लोहे के पुल (Old Iron Bridge) तक बनाई जाएगी। इसे यमुना के अब तक के सबसे ऊंचे जलस्तर से 6 फीट ज्यादा ऊंचा रखा जाएगा ताकि पानी शहर के अंदर न घुस सके। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने कहा कि बजट में मंजूरी मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है क्योंकि शहर को बार-बार गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ता है।

अगस्त 2024 में Joint Flood Committee (JFC) की रिपोर्ट में भी इस हिस्से में दीवार बनाने को सबसे सही तरीका बताया गया था। सरकार का लक्ष्य है कि अगले साल से निर्माण कार्य शुरू हो जाए और अगले मानसून सीजन से पहले इसे पूरा कर लिया जाए। जब तक नई दीवार नहीं बनती, तब तक यमुना बाजार जैसे संवेदनशील इलाकों में पुरानी दीवारों की मरम्मत का काम किया जाएगा।

बाढ़ से निपटने के लिए सरकार ने ‘Flood Control Order-2026’ भी जारी किया है। इसके तहत 2026 के मानसून के लिए खास तैयारी की गई है, जिसमें यमुना के जलस्तर की 24 घंटे निगरानी, 243 पंप और 41 नावों की तैनाती शामिल है। साथ ही एक सेंट्रल कंट्रोल रूम भी बनाया गया है।

दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने 8 जून 2026 को एक मीटिंग में दिल्ली, हरियाणा और यूपी सरकारों से मिलकर काम करने की बात कही थी। उन्होंने यमुना की सफाई के लिए MCD और NDDB के बीच एक समझौता (MoU) करने का भी ऐलान किया, ताकि डेयरी का कचरा नदी में न जाए। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने 28 जून को यमुना सफाई और वृक्षारोपण अभियान भी शुरू किया है।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पानी को बिल्कुल बाढ़plain तक नहीं पहुंचने दिया गया, तो इससे जमीन के नीचे पानी का स्तर (groundwater recharge) गिर सकता है और पर्यावरण को नुकसान हो सकता है।