Delhi में प्रदूषण से निपटने के लिए ₹8,300 करोड़ का मेगा प्लान, World Bank देगा 65% फंड
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों को जहरीली हवा से राहत दिलाने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने World Bank के साथ मिलकर 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोजेक्ट ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों को जहरीली हवा से राहत दिलाने के लिए सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने World Bank के साथ मिलकर 8,300 करोड़ रुपये के सात साल के प्रोजेक्ट ‘स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली’ का ऐलान किया है। इस योजना का मकसद शहर में बढ़ते प्रदूषण को कम करना और लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है।
इस प्रोजेक्ट की घोषणा 3 जुलाई, 2026 को की गई और इसे सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक दिल्ली के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि यह सिर्फ एक प्रोग्राम नहीं है, बल्कि दिल्ली के निवासियों को बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और टिकाऊ शहरी वातावरण देने के लिए एक लंबा निवेश है। इस पूरे काम की तैयारी के लिए 10 जुलाई, 2026 को एक खास वर्कशॉप भी रखी गई है ताकि सभी विभागों के बीच तालमेल बना रहे।
पैसे के इंतजाम की बात करें तो इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 8,300 करोड़ रुपये है, जिसमें से 65% हिस्सा World Bank देगा और बाकी 35% खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। इस योजना के तहत परिवहन, सड़क की धूल, निर्माण कार्य से निकलने वाला कचरा, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर खास ध्यान दिया जाएगा।
| मुख्य फोकस क्षेत्र | क्या कदम उठाए जाएंगे |
|---|---|
| वायु गुणवत्ता प्रबंधन | नया प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU), आधुनिक निगरानी सिस्टम और डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल होगा। |
| प्रदूषण कम करना | पुराने वाहनों को हटाना, Electric Vehicles को बढ़ावा देना और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना। |
| निगरानी प्रणाली | एक उन्नत PUC निगरानी सिस्टम बनाया जाएगा ताकि वाहनों के उत्सर्जन पर नजर रखी जा सके। |
| सहयोग | पड़ोसी राज्यों और इंडो-गंगा के मैदानी इलाकों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। |
इस मिशन में दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग, DPCC, परिवहन विभाग, PWD, MCD, दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस जैसे कई बड़े विभाग मिलकर काम करेंगे। इसका लक्ष्य न केवल प्रदूषण घटाना है, बल्कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) और ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को पूरा करने में मदद करना भी है।