Delhi: दिल्ली सरकार शहर में पानी की किल्लत को दूर करने और जमीन के नीचे घटते वाटर लेवल को बचाने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले साफ किए हुए पानी का इस्तेमाल उन कामों के
Delhi: दिल्ली सरकार शहर में पानी की किल्लत को दूर करने और जमीन के नीचे घटते वाटर लेवल को बचाने के लिए एक नई योजना पर काम कर रही है। अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले साफ किए हुए पानी का इस्तेमाल उन कामों के लिए किया जाएगा जहां पीने के साफ पानी की जरूरत नहीं होती। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) इस पूरी नीति को तैयार कर रहा है ताकि कीमती पीने के पानी की बचत हो सके।
साफ किए हुए पानी का इस्तेमाल कहां-कहां होगा?
सरकार की योजना है कि सरकारी निर्माण प्रोजेक्ट्स में कंक्रीट की क्यूरिंग, धूल दबाने और लैंडस्केपिंग के लिए इस पानी का उपयोग किया जाए। इसके अलावा, शहर के पार्कों की सिंचाई और दमकल विभाग की गाड़ियों (Fire Tenders) में भी इस पानी को इस्तेमाल करने पर विचार चल रहा है। दिल्ली जल बोर्ड ने बागवानी के लिए इस पानी को पहुंचाने के बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 90 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। सरकार इसे निजी कंपनियों को भी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की योजना बना रही है।
पानी की मौजूदा स्थिति और लक्ष्य क्या है?
दिल्ली के STPs रोजाना करीब 530 MGD (मिलियन गैलन प्रति दिन) साफ पानी पैदा करते हैं, लेकिन अभी इसका केवल 105 MGD ही इस्तेमाल हो पा रहा है। वर्तमान में DJB द्वारा CPWD, DDA, NDMC और MCD जैसी एजेंसियों को करीब 89 MGD पानी दिया जा रहा है। सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली की 34 में से 14 तहसीलें ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में हैं, यानी वहां जमीन से जरूरत से ज्यादा पानी निकाला जा रहा है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 MGD करना है।
Yamuna की सफाई और अन्य चुनौतियां
यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सरकार धोबी घाटों को हटाने और अवैध डाइंग यूनिट्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। हरियाणा से आने वाले बिना ट्रीटेड गंदे पानी को रोकने के लिए भी लंबे समय की योजना बनाई जा रही है। वहीं, कॉन्फेडरेशन ऑफ दिल्ली इंडस्ट्रीज ने बताया है कि शहर के 13 में से 11 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETPs) पुराने हो चुके हैं और उन्हें तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की जरूरत है, जिसकी जांच NEERI द्वारा की जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली सरकार गंदे पानी के इस्तेमाल के लिए क्या नियम अपना रही है?
निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले पानी के लिए Bureau of Indian Standards (BIS) के नियमों का पालन होगा, जिसमें pH लेवल 6 से 8.5 के बीच और TDS 2,000 ppm से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
दिल्ली में ग्राउंड वाटर की स्थिति क्या है?
CGWB की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है और 34 में से 14 तहसीलें ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ कैटेगरी में आ चुकी हैं।