Delhi : राजधानी दिल्ली में बिजली उत्पादन के लिए अब पानी की सतह का इस्तेमाल होगा। दिल्ली सरकार शहर की झीलों और तालाबों पर फ्लोटिंग सोलर फार्म लगाने जा रही है। इस नई पहल से न केवल बिजली पैदा होगी, बल्कि पानी का वाष्पीकरण भ
Delhi : राजधानी दिल्ली में बिजली उत्पादन के लिए अब पानी की सतह का इस्तेमाल होगा। दिल्ली सरकार शहर की झीलों और तालाबों पर फ्लोटिंग सोलर फार्म लगाने जा रही है। इस नई पहल से न केवल बिजली पैदा होगी, बल्कि पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा। सरकार ने इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी कर ली है।
बवाना झील से होगी शुरुआत, क्या है पूरा प्लान
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत उत्तर पश्चिम दिल्ली की Bawana lake से की जाएगी। यहाँ बिजली संयंत्र के पास दो कृत्रिम तालाबों का इस्तेमाल होगा, जिससे करीब 2 MW बिजली बनाने का लक्ष्य है। बवाना को इसलिए चुना गया क्योंकि यहाँ पहले से पावर प्लांट मौजूद है और दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में होने से मंजूरी मिलने में आसानी होगी।
सोलर पॉलिसी 2024 और सरकार का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने अपनी Solar Policy 2024 के तहत मार्च 2027 तक 4.5 GW सोलर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। सरकार इस पूरी पॉलिसी को लागू करने के लिए 570 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका मकसद यह है कि भविष्य में दिल्ली की करीब 20% बिजली सोलर एनर्जी से मिल सके।
फ्लोटिंग सोलर पैनल के क्या होंगे फायदे
- पानी की ठंडक की वजह से ये पैनल रूफटॉप पैनल के मुकाबले ज्यादा असरदार होते हैं।
- इनकी लागत कम होती है और बिजली उत्पादन की क्षमता बेहतर रहती है।
- पानी की सतह ढकी रहने से पानी कम सूखता है।
- कृषि भूमि पर सोलर सिस्टम लगाने के लिए अब ‘Change in Land Use’ की जरूरत नहीं होगी।
भविष्य में इस तकनीक को मुनक नहर, वजीराबाद में यमुना नदी और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के तालाबों में भी लागू किया जा सकता है। सरकार इसके लिए एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म भी लाएगी जिससे लोगों को सब्सिडी और वेंडर्स की जानकारी आसानी से मिल सके।