Delhi: दिल्ली सरकार अब राजधानी के घरों को आग से सुरक्षित बनाने के लिए बड़े कदम उठाने जा रही है। विवेक विहार और मालवीय नगर में हुए दर्दनाक हादसों के बाद अब घरों में स्मोक डिटेक्टर और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) लग
Delhi: दिल्ली सरकार अब राजधानी के घरों को आग से सुरक्षित बनाने के लिए बड़े कदम उठाने जा रही है। विवेक विहार और मालवीय नगर में हुए दर्दनाक हादसों के बाद अब घरों में स्मोक डिटेक्टर और अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने इसके लिए सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है ताकि भविष्य में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।
नए नियमों का असर किन घरों पर होगा और क्या है प्रस्ताव
अभी दिल्ली में केवल कमर्शियल बिल्डिंग्स और 15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए ही फायर सेफ्टी सिस्टम जरूरी हैं। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत अब गेटेड सोसायटियों, व्यक्तिगत घरों और रिहायशी कॉलोनियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। DFS का मानना है कि अगर घरों में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम होते हैं, तो आग से होने वाली मौतों में 97% तक की कमी आ सकती है।
लागू करने का तरीका और समय सीमा क्या होगी
इस नियम को चरणों में लागू करने की योजना है। जो नई बिल्डिंग्स बनेंगी, उन्हें तुरंत इन नियमों का पालन करना होगा। वहीं, पुराने घरों और बनी हुई इमारतों को यह सिस्टम लगाने के लिए 3 साल तक का समय दिया जा सकता है। लोगों को इस काम में मदद करने के लिए सरकार सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन देने पर भी विचार कर रही है।
अधिकारियों ने क्यों बताया इसे जरूरी
गृह मंत्री Ashish Sood ने बताया कि दिल्ली की करीब 90% इमारतों के पास फायर NOC नहीं है। DFS चीफ फायर ऑफिसर Abhilash Malik के अनुसार, आधुनिक घरों में एयर कंडीशनर और सिंथेटिक सामान के इस्तेमाल से आग बहुत तेजी से फैलती है। पहले आग को खतरनाक स्तर तक पहुंचने में 15-17 मिनट लगते थे, जो अब घटकर सिर्फ 3-5 मिनट रह गए हैं। स्मोक डिटेक्टर महज 15 सेकंड में धुएं को पहचान कर चेतावनी दे सकते हैं, जिससे लोगों को बाहर निकलने का समय मिल जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या पुराने घरों को तुरंत स्मोक डिटेक्टर लगाना होगा?
प्रस्ताव के अनुसार, नई इमारतों के लिए यह तुरंत अनिवार्य होगा, लेकिन पहले से बनी पुरानी इमारतों को सिस्टम लगाने के लिए 3 साल तक का समय दिया जा सकता है।
स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम क्यों जरूरी हैं?
स्मोक डिटेक्टर 15 सेकंड में धुएं का पता लगा लेते हैं और स्प्रिंकलर 68 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सक्रिय हो जाते हैं, जिससे आग को फैलने से रोका जा सकता है।