Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया मरीजों के लिए जीवनरक्षक Desferal इंजेक्शन की भारी कमी हो गई है। इस दवा के बिना मरीजों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो उनके लिए जानलेवा हो सकता है। सरकारी दावों
Delhi: राजधानी के सरकारी अस्पतालों में थैलेसीमिया मरीजों के लिए जीवनरक्षक Desferal इंजेक्शन की भारी कमी हो गई है। इस दवा के बिना मरीजों के शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ जाती है, जो उनके लिए जानलेवा हो सकता है। सरकारी दावों के उलट अस्पतालों में स्टॉक नहीं है, जिससे मजबूर होकर मरीज प्राइवेट मार्केट से महंगे दामों पर दवा खरीद रहे हैं।
दवा की कमी से मरीजों पर क्या असर पड़ रहा है?
थैलेसीमिया के मरीजों को शरीर से आयरन निकालने के लिए Desferal इंजेक्शन की जरूरत होती है। सरकारी अस्पतालों में यह दवा न मिलने से मरीजों को प्राइवेट मार्केट से एक बॉक्स करीब 2,900 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। कई मरीजों का महीने का खर्च 18,000 से 21,000 रुपये तक पहुँच गया है, जिसे उठाना गरीब परिवारों के लिए नामुमकिन हो रहा है।
सरकारी नियम और अस्पतालों की स्थिति क्या है?
NLEM 2022 के नियमों के मुताबिक Desferal एक जरूरी दवा है और सरकारी अस्पतालों में मुफ्त मिलनी चाहिए। साथ ही RPWD एक्ट 2016 के तहत थैलेसीमिया मरीजों को प्राथमिकता पर इलाज मिलना चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है:
- Lady Hardinge Medical College (LHMC) के अधिकारियों ने बताया कि तीन महीने पहले टेंडर निकाला गया था, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
- Safdarjung और RML अस्पताल का कहना है कि वे ओरल दवाएं (Deferasirox) दे रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर मरीज के लिए ओरल दवाएं काम नहीं करतीं।
- TPAG की सचिव अनुभा तनेजा के अनुसार, नेशनल हेल्थ मिशन की फंडिंग के बावजूद कई अस्पतालों में यह दवा गायब है।
दवा की सप्लाई में दिक्कत क्यों आ रही है?
| संबंधित पक्ष |
कहा गया तर्क/स्थिति |
| Novartis (कंपनी) |
कंपनी का दावा है कि सप्लाई में कोई कमी नहीं है। |
| LHMC अस्पताल |
इंपोर्टेड इंजेक्शन के टेंडर में कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। |
| मरीज और ग्रुप्स |
पिछले 5-6 साल से यह समस्या चल रही है। |
| सरकारी दावा |
दिसंबर 2024 में कहा गया था कि वेंडर्स को भुगतान कर दिया गया है और सप्लाई शुरू होगी। |