Delhi में महिला कॉन्स्टेबल पर कानूनी कार्रवाई, साथी पुलिसकर्मी पर लगाया था झूठा रेप का आरोप

Delhi: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इस महिला ने अपने ही एक साथी पुलिसकर्मी पर रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में कोर्ट में यह बात साम

Delhi: दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। इस महिला ने अपने ही एक साथी पुलिसकर्मी पर रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन बाद में कोर्ट में यह बात सामने आई कि ये आरोप पूरी तरह गलत थे।

मामले की सुनवाई के दौरान महिला कॉन्स्टेबल ने स्वीकार किया कि उसके और साथी पुलिसकर्मी के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। कोर्ट ने इसे कानून को गुमराह करने और झूठी शिकायत दर्ज कराने का मामला माना है। इसी वजह से अब महिला पुलिसकर्मी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

दिल्ली की अदालतों में इन दिनों झूठे रेप केस को लेकर काफी सख्त रुख अपनाया जा रहा है। साकेत कोर्ट ने भी एक ऐसे ही मामले में आरोपी को बरी करते हुए इसे हनी ट्रैप बताया था। अदालत का मानना है कि ऐसी मनगढ़ंत कहानियों और झूठी गवाही से न केवल निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद होती है, बल्कि असली पीड़ितों को न्याय मिलने में भी मुश्किल आती है।

कानूनी जानकारों के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 379 के तहत कोर्ट को गुमराह करने या झूठी गवाही देने पर 7 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही, जिस व्यक्ति पर झूठे आरोप लगे होते हैं, वह मानहानि या मानसिक प्रताड़ना के लिए सिविल केस भी कर सकता है। अदालत ने साफ कहा है कि सिर्फ आरोपी को बरी कर देना काफी नहीं है, बल्कि झूठे आरोप लगाने वालों को सजा मिलना जरूरी है ताकि न्याय पूरा हो सके।