Delhi: दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में फर्जी दवाइयां जब्त की हैं, जिनमें कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने वाली दवाएं शामि
Delhi: दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में फर्जी दवाइयां जब्त की हैं, जिनमें कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज करने वाली दवाएं शामिल थीं। यह रैकेट लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था, जिसे पुलिस ने समय रहते पकड़ लिया है।
छापेमारी में कितनी और कौन सी दवाएं मिलीं
दिल्ली पुलिस ने 23 अप्रैल को की गई छापेमारी में करीब 75 हजार से 90 हजार तक अलग-अलग तरह की दवाइयां बरामद कीं। इन दवाओं में कैंसर, अस्थमा, लिवर, टाइफाइड और पथरी के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली फर्जी दवाइयां थीं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के इलाज में काम आने वाली दवाएं भी इस खेप में मिलीं।
शहर में चल रहे अन्य नकली दवा सिंडिकेट
दिल्ली में नकली दवाओं का जाल काफी गहरा है। हाल ही में 7 मई 2026 को मुखर्जी नगर में एक पैकेजिंग यूनिट पकड़ी गई, जहां 10 करोड़ रुपये की 90,000 नकली कैप्सूल बरामद हुईं। वहीं 5 अप्रैल 2026 को क्राइम ब्रांच ने एक अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड़ किया था। इस गैंग ने 50 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी बिलिंग नेटवर्क के जरिए उत्तर भारत के कई राज्यों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की नकली दवाएं सप्लाई की थीं।
आम जनता पर क्या होगा असर
नकली दवाओं का यह कारोबार एक संगठित सिंडिकेट की तरह काम करता है, जो निर्माण से लेकर मरीज तक की पूरी चेन में फैला होता है। ऐसे में मरीजों के लिए डिजिटल निगरानी और दवाओं की नियमित जांच बहुत जरूरी हो गई है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अब इन सिंडिकेट्स की जड़ तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं ताकि लोगों को सुरक्षित दवाइयां मिल सकें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
23 अप्रैल की छापेमारी में कौन सी दवाएं जब्त हुई हैं
पुलिस ने लगभग 75 हजार से 90 हजार दवाइयां बरामद की हैं। इनमें कैंसर, अस्थमा, लिवर, टाइफाइड, पथरी और गर्भवती महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नकली दवाएं शामिल थीं।
क्या दिल्ली में ऐसे और भी मामले सामने आए हैं
हाँ, 7 मई 2026 को मुखर्जी नगर में 10 करोड़ की दवाइयां और 5 अप्रैल 2026 को एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ा गया था, जिसने 50 करोड़ के फर्जी जीएसटी बिलिंग नेटवर्क के जरिए दवाएं बेची थीं।