Delhi में EV खरीदना हुआ आसान, अब सीधे बैंक खाते में आएगी सब्सिडी; CM रेखा गुप्ता ने लॉन्च किया नया पोर्टल
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने वालों को सब्सिडी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री रेखा
Delhi: दिल्ली सरकार ने शहर में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने वालों को सब्सिडी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसके लिए एक नया सब्सिडी पोर्टल लॉन्च किया है, जिससे अब सब्सिडी का पैसा सीधे ग्राहक के बैंक खाते में भेजा जाएगा।
दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026, जो 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है, का मुख्य उद्देश्य दिल्ली को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की राजधानी बनाना है। यह नीति 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बना दिया है ताकि आम लोगों को कोई परेशानी न हो।
इच्छुक लोग अब evsubsidy.delhi.gov.in पोर्टल पर जाकर अपनी सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियम के मुताबिक, वाहन खरीदने और RC मिलने के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना जरूरी है। दस्तावेजों की डिजिटल जांच के बाद 60 दिनों के अंदर पैसा Direct Benefit Transfer (DBT) के जरिए आधार से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
| वाहन का प्रकार | अधिकतम सब्सिडी | |
|---|---|---|
| इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर | 30,000 रुपये | |
| इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर | 50,000 रुपये | |
| N1 कैटेगरी इलेक्ट्रिक ट्रक | 1 लाख रुपये |
इस नीति के तहत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट दी गई है। पुराने प्रदूषित वाहनों को कबाड़ (scrapping) में देने पर अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह सब्सिडी केवल शुद्ध इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए है, हाइब्रिड वाहनों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। साथ ही, सब्सिडी लेने वाले लोग तीन साल तक अपने वाहन को किसी दूसरे राज्य में रजिस्टर नहीं करा पाएंगे।
भविष्य के लिए सरकार ने सख्त नियम भी बनाए हैं। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (L-5 ऑटो) और N1 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक गुड्स वाहन ही रजिस्टर होंगे। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से नए टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। सरकार इस पूरी योजना के लिए अगले चार वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश करेगी।