Delhi EV Policy 2026 लागू, पेट्रोल-सीएनजी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लगेगा ब्रेक; ऑटो कंपनियों की बढ़ सकती है टेंशन

Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी की हवा को साफ करने और प्रदूषण कम करने के लिए नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 लागू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस पॉलिसी को मंजूरी दी है, जो 1 जुलाई 2026

Delhi: दिल्ली सरकार ने राजधानी की हवा को साफ करने और प्रदूषण कम करने के लिए नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026 लागू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस पॉलिसी को मंजूरी दी है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है और 31 मार्च 2030 तक चलेगी। इस नीति का सीधा असर दिल्ली में नई गाड़ियां खरीदने वालों और ऑटोमोबाइल कंपनियों पर पड़ेगा।

इस नई नीति के तहत सरकार ने गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के लिए सख्त समय सीमा तय की है। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा और 3.5 टन से कम वजन वाले कमर्शियल वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा। वहीं 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और सीएनजी टू-व्हीलर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा और सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही खरीदे जा सकेंगे। इसके अलावा डीटीसी की नई अंतर-शहर बसें और सरकार द्वारा लीज पर लिए गए वाहन भी अब पूरी तरह इलेक्ट्रिक होंगे। स्कूल बसों के लिए भी लक्ष्य रखा गया है कि 2030 तक उनके बेड़े का 30% हिस्सा इलेक्ट्रिक हो जाए।

आम जनता को इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने के लिए सरकार भारी छूट और सब्सिडी दे रही है। 31 मार्च 2030 तक पात्र बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी। यात्री कारों के मामले में यह लाभ उन गाड़ियों पर मिलेगा जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 30 लाख रुपये या उससे कम है, हालांकि हाइब्रिड गाड़ियां इसमें शामिल नहीं हैं।

वाहन का प्रकार सब्सिडी/प्रोत्साहन विवरण
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पहले साल ₹30,000, दूसरे साल ₹20,000 और तीसरे साल ₹10,000 की सब्सिडी
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पहले साल ₹50,000 तक का प्रोत्साहन
पुरानी कार स्क्रैपेज BS4 या पुरानी कार स्क्रैप कर 30 लाख से कम की EV लेने पर पहले 1 लाख लोगों को ₹1 लाख प्रोत्साहन
टोटल बजट अगले 4 साल में ₹15,000 करोड़ का निवेश (₹7,000 करोड़ प्रोत्साहन और ₹8,000 करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए)

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सुविधा बढ़ाने के लिए दिल्ली में करीब 32,000 चार्जिंग पॉइंट लगाने की योजना है। अब हर कंपनी की डीलरशिप पर कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन होना जरूरी होगा। दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) को इस पूरे चार्जिंग नेटवर्क की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि यह नीति ऑटो कंपनियों के लिए चुनौती बन सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर दिल्ली की तर्ज पर अन्य राज्य भी ऐसी नीतियां लाते हैं, तो उन कंपनियों को बड़ा नुकसान हो सकता है जिनके पास इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रेंज कम है। हालांकि, Hero MotoCorp, Bajaj Auto और TVS Motor जैसी कंपनियां अपने मजबूत EV पोर्टफोलियो की वजह से इस बदलाव का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगी। मॉर्गन स्टेनली ने सुझाव दिया है कि प्रदूषण कम करने के लिए पुराने वाहनों को तेजी से हटाना और बैटरी सेल का निर्माण भारत में ही करना जरूरी है।