Delhi EV Policy 2.0 से Karol Bagh के मैकेनिकों में डर, बोले- छिन जाएगी हमारी रोजी-रोटी
Delhi: दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 ने शहर के वाहन मरम्मत केंद्रों में खलबली मचा दी है। खासकर Karol Bagh के टू-व्हीलर रिपेयर हब में काम करने वाले मैकेनिकों को डर है कि आने वाले समय में उनका काम पू
Delhi: दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 ने शहर के वाहन मरम्मत केंद्रों में खलबली मचा दी है। खासकर Karol Bagh के टू-व्हीलर रिपेयर हब में काम करने वाले मैकेनिकों को डर है कि आने वाले समय में उनका काम पूरी तरह बंद हो जाएगा। पेट्रोल और CNG गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लगने वाली रोक से अब उनकी रोजी-रोटी पर संकट मंडरा रहा है।
यह नई पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है और 31 मार्च 2030 तक चलेगी। नियमों के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और N1 कैटेगरी के हल्के गुड्स कैरियर ही रजिस्टर किए जा सकेंगे। इसके बाद 1 अप्रैल 2028 से टू-व्हीलर्स के लिए भी यही नियम लागू होगा, जिसका मतलब है कि उस तारीख के बाद पेट्रोल या CNG वाले नए स्कूटर और मोटरसाइकिल रजिस्टर नहीं होंगे। हालांकि, जो गाड़ियां पहले से रजिस्टर्ड हैं, उन्हें उनकी पूरी लाइफसाइकिल तक चलाने की अनुमति होगी।
करोल बाग के मैकेनिक संजय कुमार और अभिषेक जैसे कई लोग इस बदलाव से चिंतित हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सालों तक पेट्रोल इंजन ठीक करना सीखा है, लेकिन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तकनीक बिल्कुल अलग है। उन्हें डर है कि बिना नई ट्रेनिंग के वे इस बदलाव के साथ तालमेल नहीं बिठा पाएंगे। दूसरी तरफ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पॉलिसी को बदलाव लाने वाला बताया है। उनका कहना है कि इससे हवा की क्वालिटी सुधरेगी और शहर में टिकाऊ ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।
इस पॉलिसी को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। TERI के शरीफ कमर और CSE की अनुमिता रॉयचौधरी ने इस कदम की सराहना की है, लेकिन उन्होंने चार्जिंग स्टेशनों के जाल को तेजी से बढ़ाने की जरूरत बताई है। वहीं, FADA और SIAM जैसे ऑटो इंडस्ट्री संगठनों ने चिंता जताई है कि इस नियम के बाद लोग पड़ोसी राज्यों में जाकर पेट्रोल गाड़ियां रजिस्टर करवा सकते हैं, जिससे बाजार में गड़बड़ी हो सकती है।
सरकार ने लोगों को EV अपनाने के लिए कई फायदे भी दिए हैं। इसमें खरीदारी पर इंसेंटिव, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से छूट, और पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करके नई EV लेने पर मदद शामिल है। अब देखना यह होगा कि करोल बाग जैसे हब के मैकेनिक खुद को नई तकनीक के हिसाब से कैसे ढालते हैं।