Delhi: दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई EV Policy 2.0 का मसौदा जारी किया है। इस नीति का मकसद शहर में प्रदूषण कम करना और ई-वाहनों की संख्या बढ़ाना है। लेकिन इस चमक के पीछे पुरानी बैटरियों के
Delhi: दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई EV Policy 2.0 का मसौदा जारी किया है। इस नीति का मकसद शहर में प्रदूषण कम करना और ई-वाहनों की संख्या बढ़ाना है। लेकिन इस चमक के पीछे पुरानी बैटरियों के निपटान का एक बड़ा संकट छिपा है, जो पर्यावरण और लोगों की सेहत के लिए किसी टाइम बम से कम नहीं है।
EV Policy 2.0 में क्या हैं खास बदलाव और फायदे
दिल्ली सरकार ने 11 अप्रैल, 2026 को इस नीति का ड्राफ्ट पेश किया है। इसमें इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदने वालों के लिए कई छूट दी गई हैं। परिवहन मंत्री पंकज सिंह के मुताबिक इसे आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले EV पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी।
- हाइब्रिड गाड़ियों पर 30 लाख तक की कीमत पर 50% की छूट का प्रस्ताव है।
- 1 अप्रैल, 2028 से नए पेट्रोल-डीजल दोपहिया वाहनों की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
- 1 जनवरी, 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा।
पुरानी बैटरियों से क्यों बढ़ रहा है खतरा
ई-रिक्शा में इस्तेमाल होने वाली लेड-एसिड बैटरियां हर 7 से 8 महीने में खराब हो जाती हैं। टॉक्सिक्स लिंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में बैटरी रीसाइक्लिंग के पास की मिट्टी में सीसा (Lead) का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ गया है। कुछ जगहों पर यह तय सीमा से आठ गुना ज्यादा पाया गया है, जिससे पास के स्कूलों और घरों के लोगों की सेहत को खतरा है।
| विवरण |
आंकड़े/जानकारी |
| ई-रिक्शा बैटरी जीवनकाल |
7-8 महीने |
| एक बैटरी में लेड की मात्रा |
लगभग 20 किलोग्राम |
| अवैध रीसाइक्लिंग दर |
भारत में लगभग 70% |
| दिल्ली में ई-कचरा निपटान |
95% से अधिक का सही निपटान नहीं |
| मिट्टी में लेड स्तर |
43,800 PPM तक (खतरनाक सीमा 5000 PPM) |
बैटरी कचरे को रोकने के लिए सरकार का क्या प्लान है
नई नीति में ई-कचरे के सही निपटान के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। अब बैटरी बनाने वाली कंपनियों (OEMs) की यह कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वे पुरानी बैटरियों को वापस इकट्ठा करें और उन्हें सही तरीके से रीसाइकिल करें।
इस पूरे काम की निगरानी के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। इसके अलावा, होलंबी कलां में 11.4 एकड़ में एक ई-वेस्ट इको-पार्क बनाया जा रहा है, जहाँ हर साल 51,000 मीट्रिक टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से साफ किया जा सकेगा। सरकार PPP मॉडल के तहत शहर में बैटरी कलेक्शन सेंटर भी खोलेगी।