Delhi: दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने पहचान चोरी के जरिए किए गए 141 करोड़ रुपये के GST घोटाले का पर्दाफाश किया है। जालसाजों ने आम लोगों के PAN कार्ड और अन्य दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां ब
Delhi: दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने पहचान चोरी के जरिए किए गए 141 करोड़ रुपये के GST घोटाले का पर्दाफाश किया है। जालसाजों ने आम लोगों के PAN कार्ड और अन्य दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बनाईं और सरकार को करोड़ों का चूना लगाया। पुलिस ने इस मामले में तीन अलग-अलग केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ यह बड़ा घोटाला और कौन हुए शिकार
इस धोखाधड़ी में दिल्ली के एक कारोबारी और 63 साल की एक महिला के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। जालसाजों ने महिला के PAN कार्ड और उनकी पुरानी पार्टनरशिप फर्म की जानकारी का उपयोग कर फर्जी GST रजिस्ट्रेशन कराया। वहीं, उत्तर दिल्ली के एक कारोबारी के PAN कार्ड से फर्जी बिजनेस एंटिटी बनाकर करोड़ों के ट्रांजैक्शन किए गए। इन फर्जी कंपनियों के जरिए भारी मात्रा में टैक्स चोरी की गई।
धोखाधड़ी का पूरा ब्यौरा और आंकड़ों की जानकारी
| विवरण |
जानकारी |
| कुल घोटाला |
लगभग ₹141 करोड़ |
| ITC धोखाधड़ी |
₹99.8 करोड़ (एक मामले में) |
| फर्जी ट्रांजैक्शन |
₹32 करोड़ से अधिक |
| जांच एजेंसी |
EOW, दिल्ली पुलिस |
| मुख्य तरीका |
Identity Theft (PAN कार्ड का गलत इस्तेमाल) |
GST कानून के तहत क्या होगी कार्रवाई
GST एक्ट की धारा 122 के तहत फर्जी इनवॉइस जारी करना और बिना माल मिले Input Tax Credit (ITC) लेना अपराध है। CGST एक्ट 2017 की धारा 132 के तहत टैक्स चोरी की रकम के आधार पर दोषियों को जेल की सजा हो सकती है। साथ ही, CGST रूल्स के नियम 86A के तहत टैक्स अधिकारियों के पास संदिग्ध ITC को ब्लॉक करने का अधिकार है, जिसका इस्तेमाल इस मामले में किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
इस GST घोटाले में जालसाजों ने क्या तरीका अपनाया?
अपराधियों ने आम लोगों के PAN कार्ड और फर्म के दस्तावेजों की चोरी की और उनके नाम पर फर्जी GST रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का Input Tax Credit (ITC) क्लेम किया गया।
GST धोखाधड़ी के लिए कानून में क्या सजा का प्रावधान है?
CGST एक्ट 2017 की धारा 132 के तहत टैक्स चोरी की राशि के हिसाब से जेल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही धारा 122 के तहत फर्जी बिल बनाना दंडनीय अपराध है।