Delhi में पर्यावरण फंड का केवल 43% इस्तेमाल, जागरूकता अभियानों पर खर्च हुए 10 करोड़ से ज्यादा
Delhi: राजधानी की हवा और पानी को साफ करने के लिए जमा किए गए पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। एक दशक के आंकड़ों से पता चला है कि पर्यावरण मुआवजा कोष (Environment Compensation Fund) में जमा राशि का केवल 43% हिस्सा ही
Delhi: राजधानी की हवा और पानी को साफ करने के लिए जमा किए गए पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। एक दशक के आंकड़ों से पता चला है कि पर्यावरण मुआवजा कोष (Environment Compensation Fund) में जमा राशि का केवल 43% हिस्सा ही खर्च किया गया। हैरानी की बात यह है कि जहां जमीन पर काम कम हुआ, वहीं जागरूकता फैलाने और विज्ञापनों पर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए गए।
National Green Tribunal (NGT) के निर्देश पर Delhi Pollution Control Committee (DPCC) ने एक हलफनामा दायर किया। इसमें बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2025-26 के बीच प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं से कुल ₹158.88 करोड़ जमा हुए थे। लेकिन इस पूरी राशि में से केवल ₹68.07 करोड़ का ही उपयोग किया गया। पिछले तीन सालों (2022-23 से 2024-25) की बात करें तो हवा, पानी और हरियाली को सुधारने के लिए लगभग ₹45 करोड़ खर्च हुए।
| विवरण | खर्च की गई राशि |
|---|---|
| जागरूकता, विज्ञापन और छपाई (3 वर्ष) | ₹10.30 करोड़ |
| ध्वनि प्रदूषण निगरानी स्टेशन | ₹86.71 लाख |
| वित्तीय वर्ष 2022-23 में कुल खर्च | ₹1.45 करोड़ |
| वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल खर्च | ₹7.84 करोड़ |
| वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल खर्च | ₹35.93 करोड़ |
पैसों के इस्तेमाल में सबसे ज्यादा खर्च तालाबों और जलाशयों को फिर से जीवित करने पर किया गया। इसके अलावा आधुनिक लैब बनाने और शोर प्रदूषण को रोकने पर भी पैसा लगा। इस पूरे मामले का खुलासा पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा दायर RTI के बाद हुआ।
दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए नए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विश्व बैंक के सहयोग से ₹8,300 करोड़ की “स्वच्छ हवा, स्वस्थ दिल्ली” परियोजना की घोषणा की है। यह प्रोग्राम सितंबर 2026 से अगस्त 2033 तक चलेगा। साथ ही, 1 जुलाई 2026 से “नो पीयूसी, नो फ्यूल” नियम लागू किया गया है, जिसके तहत बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के ईंधन नहीं मिलेगा। यह नियम हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा और इस दौरान पार्किंग शुल्क भी दोगुना होगा।
सरकार ने अन्य कदम भी उठाए हैं। पुराने ट्रकों और बसों को BS6 या इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए ₹541 करोड़ की योजना को मंजूरी दी गई है। साथ ही, दिल्ली में आने वाले कमर्शियल वाहनों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में हर साल 5% की बढ़ोतरी की जाएगी।