Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए बिजली का बिल बढ़ना तय लग रहा है। अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें 30,000 करोड़ रुपये के बकाये के भुगता
Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए बिजली का बिल बढ़ना तय लग रहा है। अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें 30,000 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए और समय मांगा गया था। इस फैसले के बाद अब बिजली दरों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है।
बिजली महंगी होने की मुख्य वजह क्या है?
दिल्ली में साल 2014 से बिजली की दरें स्थिर रही हैं, जिसकी वजह से नियामक परिसंपत्तियां (regulatory assets) जमा हो गई हैं। निजी बिजली वितरण कंपनियां जैसे BRPL, BYPL और TPDDL का लगभग 30,000 करोड़ रुपये का बकाया लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2025 में निर्देश दिया था कि अप्रैल 2024 से लंबित बकाये को अप्रैल 2028 तक चुकाना होगा। अब APTEL ने DERC को अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया है, जिससे यह पैसा उपभोक्ताओं से वसूला जा सकता है।
आम जनता की जेब पर कितना असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डिस्कॉम अगले दो वर्षों में यह पूरी रकम वसूलना चाहते हैं, तो बिजली की दरों में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। 1 अप्रैल, 2026 से बिजली बिलों पर एक बड़ा रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज लगने की संभावना है। हालांकि, दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि सरकार कोशिश करेगी कि उपभोक्ताओं पर इस बढ़ोतरी का बोझ न पड़े। लेकिन जानकारों के मुताबिक, बिना भारी सब्सिडी के बिल बढ़ना तय है।
महत्वपूर्ण तारीखें और विवरण
| तारीख/अवधि |
विवरण |
| 20 अप्रैल, 2026 |
APTEL ने DERC की मोहलत वाली याचिका खारिज की |
| अगस्त 2025 |
सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चुकाने की समयसीमा तय की |
| 1 अप्रैल, 2026 |
बिजली बिलों पर सरचार्ज लगने की संभावना |
| अप्रैल 2028 |
बकाया राशि चुकाने की अंतिम समयसीमा |
| 2014 से अब तक |
दिल्ली में बिजली दरें स्थिर रही हैं |