Delhi की बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 15 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश

Delhi: दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के ऑडिट को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में अंतरिम रोक लगाते हुए 15 जुलाई, 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया ह

Delhi: दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) के ऑडिट को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने शुक्रवार को इस मामले में अंतरिम रोक लगाते हुए 15 जुलाई, 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब बिजली कंपनियों के ऑडिट की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है।

पूरा मामला दिल्ली सरकार द्वारा निजी बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट के आदेश से जुड़ा है। दिल्ली सरकार ने 2 जुलाई, 2026 को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को एक विशेष ऑडिट करने को कहा था। इस ऑडिट का मुख्य मकसद यह पता लगाना था कि नियामक परिसंपत्तियों (Regulatory Assets) के नाम पर 38,500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि कैसे जमा हुई और इसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर क्यों डाला गया।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की अपील पर नोटिस जारी करते हुए न केवल दिल्ली सरकार के CAG ऑडिट के आदेश पर रोक लगाई, बल्कि बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) के उस निर्देश पर भी रोक लगा दी जिसमें एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने को कहा गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बताया है। मुख्य विवाद इस बात पर है कि क्या DERC द्वारा CAG को ऑडिट सौंपना कानूनी रूप से सही है। इस मामले में शामिल मुख्य विवरण नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

विवरण जानकारी
रोक की तारीख 3 जुलाई, 2026
अगली सुनवाई 15 जुलाई, 2026
ऑडिट राशि 38,500 करोड़ रुपये (Regulatory Assets)
प्रभावित कंपनियां BSES (BRPL, BYPL) और Tata Power (TPDDL)
सुनवाई करने वाली पीठ जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर
मुख्य तर्क (DERC) बिना ऑडिट के उपभोक्ताओं पर बोझ डालना गलत होगा
मुख्य तर्क (Discoms) परिसंपत्तियों की वसूली का रोडमैप 2031 तक पहले ही तय है

DERC की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि उपराज्यपाल ने सभी नियमों का पालन करके ही ऑडिट को मंजूरी दी है। वहीं, बिजली कंपनियों की ओर से वरिष्ठ वकील ए.एम. सिंघवी और बडी रंगनाथन ने कहा कि ऑडिट और पैसे की वसूली दो अलग मुद्दे हैं। अब सबकी नजरें 15 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।