Delhi : राजधानी दिल्ली में बढ़ते धूल प्रदूषण और खराब होती हवा को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने अब निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) वाली जगहों के लिए नए नियम जारी किए हैं।
Delhi : राजधानी दिल्ली में बढ़ते धूल प्रदूषण और खराब होती हवा को रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने अब निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) वाली जगहों के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद हवा में उड़ने वाली धूल को कम करना है ताकि आम लोगों को सांस लेने में परेशानी न हो।
ग्रीन नेट के लिए क्या हैं नए नियम और शर्तें?
DPCC ने 11 और 12 मई 2026 से यह अनिवार्य कर दिया है कि सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स पर हाई-डेंसिटी ग्रीन नेट का इस्तेमाल होगा। अब इस नेट की मोटाई कम से कम 100 ग्राम प्रति वर्ग मीटर (GSM) होनी चाहिए। पहले केवल ग्रीन नेट लगाने को कहा गया था लेकिन उसकी मोटाई तय नहीं थी, जिसकी वजह से लोग पतले और बेकार नेट लगा देते थे। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री Manjinder Singh Sirsa ने कहा कि 100 GSM का मानक धूल को रोकने में ज्यादा असरदार होगा।
इन सरकारी एजेंसियों को नियमों का पालन कराना होगा
इन नियमों को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी कई बड़ी एजेंसियों को दी गई है। इसमें Municipal Corporation of Delhi (MCD), NDMC, DDA, DMRC, CPWD और PWD शामिल हैं। साथ ही सरकार ‘Dust Portal 2.0’ भी ला रही है, जिससे शहर की सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स की निगरानी एक ही जगह से हो सकेगी। अब सभी निर्माण कार्यों का इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।
जमीनी हकीकत और एक्सपर्ट्स की राय
एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आदेशों के बावजूद कई जगहों पर अभी भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने 100 GSM नेट के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन उनका कहना है कि जब तक सख्ती से चेकिंग नहीं होगी, तब तक इसका फायदा नहीं मिलेगा। TERI और ARAI की एक स्टडी में सामने आया था कि गर्मियों में दिल्ली के PM10 प्रदूषण में 42% तक का हिस्सा सिर्फ धूल का होता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कंस्ट्रक्शन साइट्स के लिए ग्रीन नेट का नया नियम क्या है?
DPCC के नए आदेश के अनुसार, अब सभी निर्माण स्थलों पर कम से कम 100 GSM मोटाई वाले हाई-डेंसिटी ग्रीन नेट लगाना अनिवार्य है ताकि धूल हवा में न फैले।
धूल प्रदूषण पर निगरानी के लिए सरकार क्या नया सिस्टम ला रही है?
सरकार ‘Dust Portal 2.0’ नाम का एक प्लेटफॉर्म बना रही है, जहाँ सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स का रजिस्ट्रेशन होगा और उनकी मॉनिटरिंग की जाएगी।