Delhi: राजधानी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जो जुर्माना वसूला गया, उसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी खातों में ही पड़ा रहा। RTI से पता चला है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने पिछले 10 साल में जमा हुए पर्यावरण
Delhi: राजधानी दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जो जुर्माना वसूला गया, उसका एक बड़ा हिस्सा सरकारी खातों में ही पड़ा रहा। RTI से पता चला है कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने पिछले 10 साल में जमा हुए पर्यावरण क्षतिपूर्ति कोष का केवल 43 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल किया है। यह पैसा उन कंपनियों और इकाइयों से लिया गया था जिन्होंने पर्यावरण नियमों को तोड़ा था।
कितना पैसा जमा हुआ और कितना खर्च हुआ?
पर्यावरण कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा दायर RTI के जवाब में साल 2015-16 से 2025-26 तक के आंकड़े सामने आए हैं। नियमों के मुताबिक यह पैसा दिल्ली की हवा और पानी को साफ करने के काम आना चाहिए था, लेकिन खर्च की रफ्तार काफी धीमी रही।
| विवरण |
रकम (करोड़ रुपये में) |
| कुल एकत्रित निधि (2015-16 से 2025-26) |
158.88 |
| कुल खर्च की गई राशि |
68.07 |
| सबसे ज्यादा फंड संग्रह (फरवरी 2026 तक) |
36.53 |
| सबसे ज्यादा खर्च (साल 2024-25 में) |
35.93 |
शोर प्रदूषण और AQI सुधार के लिए क्या तैयारी है?
एक तरफ फंड के कम इस्तेमाल की बात सामने आई है, वहीं DPCC ने शोर प्रदूषण को रोकने के लिए 17 अप्रैल को एक नई SOP जारी की है। अब नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, DPCC ने एक महा प्लान बनाया है जिसके तहत साल 2026 के अंत तक दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में 15% सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है।
NGT की सख्ती और अधिकारियों का क्या कहना है?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस मामले में सख्ती दिखाई है। फरवरी 2026 में वृक्षारोपण निधि भेजने में देरी के कारण DPCC पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मार्च 2026 में कहा था कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर पैसा खर्च नहीं हुआ, तो दिल्ली की हवा सुधारने के काम में देरी होगी।