Delhi: राजधानी के सेंट्रल दिल्ली इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 70 साल के रिटायर्ड सरकारी अफसर, जो अल्जाइमर की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके साथ उनके ही भरोसेमंद घरेलू सहायक ने धोखाधड़ी की। आरोपी
Delhi: राजधानी के सेंट्रल दिल्ली इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 70 साल के रिटायर्ड सरकारी अफसर, जो अल्जाइमर की बीमारी से जूझ रहे हैं, उनके साथ उनके ही भरोसेमंद घरेलू सहायक ने धोखाधड़ी की। आरोपी ने मरीज की याददाश्त कमजोर होने का फायदा उठाकर उनके बैंक खाते से करीब 2.6 लाख रुपये निकाल लिए।
कैसे हुई यह धोखाधड़ी और कब हुआ खुलासा
यह पूरा मामला 4 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच का है। आरोपी देविंदर, जो पिछले 15 सालों से परिवार के साथ ड्राइवर और हेल्पर के तौर पर काम कर रहा था, उसने बुजुर्ग व्यक्ति के मोबाइल का इस्तेमाल किया। वह चुपके से उनके फोन से कई UPI ट्रांजेक्शन करता रहा और पैसे अपने साथियों के खातों में भेज दिए। जब पीड़ित के बेटे ने बैंक स्टेटमेंट देखा, तो उसे कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन नजर आए, जिसके बाद उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा और क्या है अपडेट
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने इस मामले की जांच की। DCP (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने डिजिटल ट्रांजेक्शन के सबूत, बैंक अकाउंट की डिटेल्स और पैसे पाने वालों के रिकॉर्ड खंगाले। जांच में पता चला कि यह कोई बाहरी साइबर फ्रॉड नहीं बल्कि घर का ही सदस्य देविंदर था। शक होने पर आरोपी काम छोड़कर भाग गया था, लेकिन पुलिस ने उसे GTB नगर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है कि वह मरीज की बीमारी की जानकारी रखता था और इसी का फायदा उठाया।
घटना से जुड़ी मुख्य जानकारियां
| विवरण |
जानकारी |
| पीड़ित |
70 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी (केंद्रीय कृषि मंत्रालय) |
| आरोपी |
देविंदर (39 वर्ष), घरेलू सहायक और ड्राइवर |
| धोखाधड़ी की राशि |
लगभग 2.57 लाख रुपये |
| घटना की तारीख |
4 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच |
| गिरफ्तारी की जगह |
GTB नगर, दिल्ली |
| जांच एजेंसी |
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन, दिल्ली पुलिस |
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी ने पैसे चुराने के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया?
आरोपी देविंदर ने पीड़ित की अल्जाइमर बीमारी और शॉर्ट-टर्म मेमोरी लॉस का फायदा उठाया। उसने पीड़ित के मोबाइल फोन का गुप्त रूप से उपयोग करके कई UPI ट्रांजेक्शन किए और पैसे अपने साथियों के खातों में ट्रांसफर किए।
इस धोखाधड़ी का पता कैसे चला?
पीड़ित के बेटे ने जब अपने पिता के बैंक खाते में संदिग्ध UPI ट्रांजेक्शन देखे, तब उन्हें इस फ्रॉड का पता चला। इसके बाद उन्होंने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।