Delhi: राजधानी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। जालसाजों ने TRAI अधिकारी बनकर उन्हें डराया कि उनका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग
Delhi: राजधानी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-2 में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपत्ति के साथ डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हुई है। जालसाजों ने TRAI अधिकारी बनकर उन्हें डराया कि उनका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल है। दिल्ली पुलिस की IFSO विंग ने इस मामले में 600 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें इस पूरे घोटाले के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और फर्जी NGO के इस्तेमाल का खुलासा हुआ है।
कैसे काम करता है यह डिजिटल अरेस्ट स्कैम
ठगों ने सबसे पहले बुजुर्ग महिला को फोन किया और खुद को TRAI का अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि उनका नंबर किसी गैरकानूनी काम में इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद उन्होंने रिमोट एक्सेस के जरिए उनके मोबाइल का कंट्रोल ले लिया और नेट बैंकिंग से पैसे निकाल लिए। यह पूरी घटना 24 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 के बीच हुई। पुलिस के मुताबिक, ऐसे गिरोह कंबोडिया और नेपाल जैसे देशों से काम करते हैं और भारतीय बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।
किन फर्जी NGO और कंपनियों का हुआ इस्तेमाल
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए कुछ फर्जी NGO और कंपनियों के खातों का इस्तेमाल किया गया। इनमें मुख्य रूप से दो फाउंडेशन शामिल थे:
| संस्था का नाम |
रकम (करीब) |
| Shivansh Charitable Foundation |
2.1 करोड़ रुपये |
| Floresta Foundation |
4 करोड़ रुपये |
इसके अलावा Refine Alpha Metals, Metison Tour and Travel और Nature Bio Agri Chem जैसी कंपनियों के खातों में भी पैसा घुमाया गया। पुलिस ने इस मामले में वाराणसी के अरुण कुमार तिवारी और वडोदरा के चार्टर्ड अकाउंटेंट दिव्यांग पटेल समेत कई लोगों के नाम सामने लाए हैं।
कानूनी कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का दखल
सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट मामलों का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने बताया कि अब तक करीब 3,000 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है और कई मामलों को CBI को ट्रांसफर करने का सुझाव दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक अलग मामले में चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए इसे एक संगठित अपराध बताया है। कानूनन ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता और IT एक्ट 2000 के तहत धोखाधड़ी और पहचान चोरी के केस दर्ज किए जाते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या डिजिटल अरेस्ट कानूनी रूप से मान्य है?
नहीं, कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल या फोन पर किसी को घर में कैद रहने या डिजिटल तरीके से गिरफ्तार करने का आदेश नहीं देती है।
इस मामले में पुलिस ने किन धाराओं के तहत कार्रवाई की है?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (धोखाधड़ी, जबरन वसूली और डराने-धमकाने) और IT एक्ट 2000 (पहचान की चोरी और कंप्यूटर संसाधनों का गलत इस्तेमाल) के तहत केस दर्ज किया है।