Delhi-Dehradun Expressway की पहली बारिश में खुली पोल, 12 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट धंसा; NHAI ने बनाई SIT

Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, लेकिन मानसून की पहली बारिश ने ही इस 12,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सप्रेसवे क

Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था, लेकिन मानसून की पहली बारिश ने ही इस 12,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सप्रेसवे के कई हिस्से धंस गए हैं और सड़क पर बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

जुलाई के पहले हफ्ते में शामली जिले के खेड़ा मस्तान गांव और मुजफ्फरनगर के पास एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्से भारी बारिश की वजह से धंस गए थे। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद निर्माण कार्य की क्वालिटी को लेकर काफी विरोध हुआ। NHAI ने शुरुआत में इसका कारण भारी बारिश, जलभराव और स्थानीय विरोध की वजह से ड्रेनेज सिस्टम का पूरा न होना बताया था। हालांकि, मामले के तूल पकड़ने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू की है।

NHAI ने 4 जुलाई 2026 को लापरवाही बरतने के आरोप में इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी के टीम लीडर कुलदीप कुमार राजदान और निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेंद्र पाल सिंह को सस्पेंड कर दिया। साथ ही चैतन्य प्रोजेक्ट्स के सहायक राजमार्ग अभियंता आलोक कुमार को डिबार किया गया और कई ठेकेदार फर्मों को ब्लैकलिस्ट की सूची में डाल दिया गया है। संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं।

ताजा अपडेट के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को NHAI ने एक SIT का गठन किया है जिसमें स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट एजेंसी, NHAI इंजीनियर और एक रिटायर्ड मुख्य अभियंता शामिल होंगे। यह टीम एक्सप्रेसवे के 23 अलग-अलग स्थानों पर तकनीकी ऑडिट करेगी। जांच के दौरान कोर कटिंग के जरिए सड़क की परतों और सेंटर लाइन की बारीकी से जांच की जाएगी। NHAI ने साफ किया है कि अगर जांच में कोई कमी मिलती है, तो सुधार का पूरा खर्च ठेकेदार को ही उठाना होगा।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि ड्रेनेज सिस्टम में गड़बड़ी थी और पक्की नालियों की जगह सिर्फ कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया था। साथ ही जमीन विवाद के कारण ढलान बनाने में देरी हुई और कुछ जगहों पर स्थानीय लोग कलवर्ट के मुहाने का इस्तेमाल वाहनों के लिए कर रहे थे, जिससे पानी का बहाव रुक गया। मरम्मत के चलते 8 जुलाई को ट्रैफिक डायवर्ट करने के लिए एडवाइजरी भी जारी की गई थी।