UP: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अब गाड़ियां तेजी से दौड़ रही हैं और यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर महज ढाई से तीन घंटे रह गया है। लेकिन गाजियाबाद के मंडोला गांव में एक दो मंजिला मकान ‘स्वाभिमान’ इस आधुनिक सड
UP: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अब गाड़ियां तेजी से दौड़ रही हैं और यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर महज ढाई से तीन घंटे रह गया है। लेकिन गाजियाबाद के मंडोला गांव में एक दो मंजिला मकान ‘स्वाभिमान’ इस आधुनिक सड़क के बीच में बाधा बना हुआ है। इस एक घर की वजह से एक्सप्रेसवे का एक अहम हिस्सा अब भी अधूरा है और मामला कानूनी लड़ाई में फंसा है।
क्यों अधूरा है एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा
यह पूरा विवाद 1998 से शुरू हुआ था जब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने मंडोला आवास योजना के लिए जमीन ली थी। स्वर्गीय वीरसेन सरोहा के परिवार ने उस समय के मुआवजे को कम मानकर उसे लेने से मना कर दिया था। अब परिवार की नई पीढ़ी लक्ष्यवीर सोराह मौजूदा बाजार दरों के हिसाब से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसी वजह से एक्सप्रेसवे का एक जरूरी रैंप नहीं बन पाया है।
NHAI ने क्या किया और कोर्ट का क्या आदेश है
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने यातायात को चालू रखने के लिए घर के पीछे से एक संकरी वैकल्पिक सड़क बनाई है। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 2024 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि इस पुराने विवाद पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला सुनाया जाए। एक्सप्रेसवे की कुल लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये है और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को उद्घाटन किया था।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद 20 अप्रैल 2026 को गणेशपुर के पास फ्लाईओवर की दीवार में दरारें देखी गईं। NHAI ने एंकर प्लेट्स लगाकर इसकी मरम्मत की और इसे एक तकनीकी प्रक्रिया बताया। हालांकि, विशेषज्ञों ने निर्माण की क्वालिटी और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। एक्सप्रेसवे में वन्यजीवों के लिए 12 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर और हाथियों के लिए अंडरपास जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई और लागत कितनी है
यह एक्सप्रेसवे लगभग 210-213 किलोमीटर लंबा है और इसकी अनुमानित लागत करीब 12,000 करोड़ रुपये है।
मंडोला गांव का विवाद कितने साल पुराना है
यह भूमि विवाद 1998 से चल रहा है, जब उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने जमीन अधिग्रहण शुरू किया था।