Delhi-Dehradun कॉरिडोर पर सड़क धंसी, NHAI ने अधिकारियों और ठेकेदार पर की बड़ी कार्रवाई
Delhi/Uttarakhand: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सड़क धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कदम उठाए हैं। इस घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर गाज गिरी है। फिलहाल सड़क क
Delhi/Uttarakhand: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर सड़क धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कदम उठाए हैं। इस घटना के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर गाज गिरी है। फिलहाल सड़क की मरम्मत कर दी गई है और ट्रैफिक को फिर से शुरू कर दिया गया है।
यह पूरी घटना 1 जुलाई 2026 की रात को हुई जब भारी बारिश की वजह से सड़क के एक हिस्से पर पानी जमा हो गया और वह धंस गई। NHAI की टीम ने अगली सुबह गश्त के दौरान इस खराबी को पकड़ा और तुरंत काम शुरू किया। 2 जुलाई 2026 तक मरम्मत का काम पूरा कर सड़क को आम जनता के लिए खोल दिया गया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल 2026 को किया था और उद्घाटन के महज दो महीने बाद ही यह हादसा हो गया।
NHAI ने आधिकारिक तौर पर बताया कि सड़क धंसने की मुख्य वजह ड्रेनेज सिस्टम का चालू न होना था। स्थानीय लोगों के विरोध के कारण स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज सिस्टम को शुरू नहीं किया जा सका था। लोग बैलेंसिंग कल्वर्ट (पुलिया) को जोड़ने नहीं दे रहे थे और उसी रास्ते से गाड़ियां निकाल रहे थे, जिससे बारिश के पानी की निकासी रुक गई और सड़क धंस गई।
इस लापरवाही पर एक्शन लेते हुए NHAI ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अथॉरिटी इंजीनियर और EPC कॉन्ट्रैक्टर को ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा है। साथ ही, अथॉरिटी इंजीनियर के टीम लीडर और कॉन्ट्रैक्टर के प्रोजेक्ट मैनेजर को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है।
| पद/इकाई | की गई कार्रवाई |
|---|---|
| प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अथॉरिटी इंजीनियर, EPC कॉन्ट्रैक्टर | कारण बताओ नोटिस जारी |
| अथॉरिटी इंजीनियर टीम लीडर | तत्काल प्रभाव से निलंबित |
| कॉन्ट्रैक्टर प्रोजेक्ट मैनेजर | तत्काल प्रभाव से निलंबित |
इस मामले में कांग्रेस पार्टी ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब एक अस्थायी समानांतर नाला बनाया जा रहा है ताकि स्थायी ड्रेनेज सिस्टम चालू होने तक पानी की निकासी होती रहे। प्रभावित इलाके की लगातार निगरानी की जा रही है।