Delhi: दिल्ली के लोगों के लिए रहना और काम करना अब आसान होने वाला है। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने नई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति लागू की है। इस मॉडल का मकसद मेट्रो और RRTS स्टेशनों के पास ऐसी इमारतें बनान
Delhi: दिल्ली के लोगों के लिए रहना और काम करना अब आसान होने वाला है। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने नई ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति लागू की है। इस मॉडल का मकसद मेट्रो और RRTS स्टेशनों के पास ऐसी इमारतें बनाना है जहां ऑफिस, घर और मनोरंजन की सुविधाएं एक ही इलाके में मिल जाएं, ताकि लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
नई TOD नीति के तहत क्या-क्या बदलेगा
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने 8 अप्रैल 2026 को इस नीति की घोषणा की। अब मेट्रो कॉरिडोर और रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में आने वाले लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास कार्य होंगे। इसमें अनधिकृत कॉलोनियों और कम घनत्व वाले आवासीय क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। अब डेवलपर्स को MCD, दिल्ली जल बोर्ड और अग्निशमन सेवा के पास अलग-अलग चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि एक ही खिड़की से सारी मंजूरी मिल जाएगी।
प्लॉट साइज और निर्माण के नए नियम
| विवरण |
नया नियम/सीमा |
| न्यूनतम प्लॉट साइज |
2,000 वर्ग मीटर (पहले 10,000 था) |
| TOD शुल्क |
10,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर (समान दर) |
| Floor Area Ratio (FAR) |
400 तक (अतिरिक्त शुल्क पर 500 तक) |
| किफायती आवास आरक्षण |
कुल FAR का कम से कम 65% हिस्सा |
| वाणिज्यिक और सामाजिक उपयोग |
कम से कम 10% FAR आरक्षित |
| सड़क की चौड़ाई |
कम से कम 18 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य |
आम आदमी और शहर पर क्या होगा असर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, इस नीति से दिल्ली में जमीन का सही इस्तेमाल होगा और प्रदूषण कम होगा क्योंकि लोग सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करेंगे। छोटे और किफायती घरों की संख्या बढ़ेगी, जिससे आम आदमी का घर का सपना पूरा होगा। पैदल चलने वालों के लिए स्टेशनों तक जाने के लिए भूमिगत या एलिवेटेड रास्ते भी बनाए जाएंगे। हालांकि, कुछ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने शहर में ज्यादा भीड़भाड़ और अव्यवस्थित विकास होने की चिंता जताई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
TOD नीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य मेट्रो और RRTS स्टेशनों के पास हाई-डेनसिटी और मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्र विकसित करना है, ताकि लोग अपने घर, ऑफिस और मनोरंजन सुविधाओं के करीब रह सकें और ट्रैफिक कम हो।
डेवलपर्स के लिए मंजूरी की प्रक्रिया कितनी आसान हुई है?
अब सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू होगा, जिससे MCD और दिल्ली जल बोर्ड जैसे विभागों से अलग-अलग अनुमति नहीं लेनी होगी। मंजूरी के लिए 60 दिन की समय-सीमा तय की गई है।