Delhi में बच्चों की पढ़ाई को लेकर बढ़ी शिकायतें, DCPCR के पास आए 60 प्रतिशत से ज्यादा मामले RTE से जुड़े

Delhi: राजधानी दिल्ली में बच्चों की शिक्षा के अधिकार को लेकर बड़ी समस्या सामने आई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) के पास पिछले 15 महीनों में शिक्षा के अधिकार (RTE) से जुड़ी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। कुल शिकायत

Delhi: राजधानी दिल्ली में बच्चों की शिक्षा के अधिकार को लेकर बड़ी समस्या सामने आई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) के पास पिछले 15 महीनों में शिक्षा के अधिकार (RTE) से जुड़ी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। कुल शिकायतों में से आधे से ज्यादा मामले इसी बात को लेकर हैं कि बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं मिल रहा या पढ़ाई में दिक्कतें आ रही हैं।

आंकड़ों की बात करें तो अप्रैल 2025 से जून 2026 के बीच DCPCR ने कुल 2,214 शिकायतों पर काम किया, जिनमें से 1,337 शिकायतें सीधे तौर पर RTE से जुड़ी थीं। इन शिकायतों में मुख्य रूप से जरूरी कागजात न होना, परिवार के आपसी झगड़े, गरीबी और बाल मजदूरी जैसे कारण सामने आए हैं, जिनकी वजह से बच्चों की पढ़ाई रुक रही है।

DCPCR के चेयरमैन ओम प्रकाश व्यास ने साफ कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और किसी भी बच्चे को इससे वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने बताया कि जुलाई के महीने को ‘चाइल्ड सेफ्टी मंथ’ के तौर पर मनाया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग जिलों के 20 स्कूलों का दौरा किया जाएगा ताकि वहां बच्चों की सुरक्षा और नियमों के पालन की जांच की जा सके।

शिकायतों के निपटारे के लिए आयोग ने एक ‘कोर्ट रूम’ जैसा सिस्टम बनाया है, जहां मामलों की सुनवाई होगी और उसी दिन उनका फैसला करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही, अब उन बच्चों का डेटा भी निकाला जाएगा जो स्कूल से गायब रहते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से बच्चे पढ़ाई छोड़ने के जोखिम में हैं और उन्हें वापस स्कूल लाया जा सके।

जानकारी के लिए बता दें कि RTE एक्ट 2009 के तहत 6 से 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। इस कानून के मुताबिक प्राइवेट स्कूलों को अपनी 25 प्रतिशत सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए रिजर्व रखनी होती हैं, जिसका खर्च सरकार उठाती है। साथ ही स्कूलों में डोनेशन लेना या एडमिशन के लिए इंटरव्यू करना पूरी तरह मना है।