Delhi : राजधानी दिल्ली में कचरे की समस्या और बढ़ गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर दिन निकलने वाले कूड़े की मात्रा बढ़कर करीब 13 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। MCD ने बताया कि मार्च 2026 तक यह औसत 12,847 मीट्र
Delhi : राजधानी दिल्ली में कचरे की समस्या और बढ़ गई है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर दिन निकलने वाले कूड़े की मात्रा बढ़कर करीब 13 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। MCD ने बताया कि मार्च 2026 तक यह औसत 12,847 मीट्रिक टन था, लेकिन अप्रैल में कुछ दिनों तो यह 13,500 मीट्रिक टन के पार चला गया।
कचरा बढ़ने की मुख्य वजह क्या है
MCD के मुताबिक, कचरा बढ़ने का एक बड़ा कारण अब पोर्टल पर होने वाली सटीक और रियल-टाइम माप है। इससे लैंडफिल और वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स में जाने वाले कूड़े का सही हिसाब मिल रहा है। इसके अलावा, रेलवे ट्रैक, खाली प्लॉट और संवेदनशील जगहों पर चलाए गए सफाई अभियानों की वजह से भी इकट्ठा होने वाले कचरे की मात्रा बढ़ी है। अकेले एक महीने में रेलवे ट्रैक से 18,000 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया है।
नए SWM नियम 2026 में क्या बदला है
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से नए Solid Waste Management (SWM) नियम लागू कर दिए हैं। अब कूड़े को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटना अनिवार्य होगा:
- गीला कचरा (Wet Waste)
- सूखा कचरा (Dry Waste)
- सेनेटरी कचरा (Sanitary Waste)
- विशेष देखभाल वाला कचरा (Special Care Waste)
इसके साथ ही अब Bulk Waste Generators (BWGs) यानी बड़े संस्थानों की जवाबदेही बढ़ गई है। जिन जगहों का क्षेत्रफल 20,000 वर्ग मीटर से ज्यादा है या जहाँ रोजाना 100 किलो से ज्यादा कचरा निकलता है, उन्हें अपने कचरे के निपटान का खुद इंतजाम करना होगा।
मैनेजमेंट की चुनौतियां और मौजूदा स्थिति
| विवरण |
आंकड़े/जानकारी |
| 2025 का औसत कचरा |
11,300 मीट्रिक टन प्रतिदिन |
| मार्च 2026 का औसत |
12,847 मीट्रिक टन प्रतिदिन |
| अनट्रीटेड कचरा (SC रिपोर्ट) |
3,800 टन प्रतिदिन से ज्यादा |
| नियम लागू होने की तारीख |
1 अप्रैल 2026 |
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के कचरा प्रबंधन पर नाराजगी जताई है क्योंकि अभी भी रोजाना 3,800 टन से ज्यादा कचरा बिना ट्रीटमेंट के रह जाता है। MCD का कहना है कि कुछ जोन से मिला-जुला कचरा (गाद और मलबा) आ रहा है, जिससे मात्रा बढ़ी है। आने वाले 4-5 महीनों में टेंडर प्रक्रिया के बाद नई एजेंसियां काम संभालेंगी, जिससे व्यवस्था सुधरने की उम्मीद है।