Delhi: CBI हिरासत में पिटाई का आरोप, कोर्ट ने दिए जांच के आदेश; आरोपी के कान में जमा हुआ खून

Delhi: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक मामले में सीबीआई (CBI) हिरासत के दौरान हुई हिंसा के आरोपों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला नकली दवा रैकेट में रिश्वतखोरी

Delhi: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक मामले में सीबीआई (CBI) हिरासत के दौरान हुई हिंसा के आरोपों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला नकली दवा रैकेट में रिश्वतखोरी से जुड़ा है, जिसमें आरोपी प्रभात कुमार ने सीबीआई अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाया है।

विशेष सीबीआई जज सुशांत चांगोट्रा ने मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी जांच एजेंसी, चाहे मामला कितना भी गंभीर क्यों न हो, पूछताछ के दौरान शारीरिक हिंसा या प्रताड़ना का सहारा नहीं ले सकती। जज ने टिप्पणी की कि हिरासत में हिंसा कानून के शासन पर सबसे गंभीर हमला है और यह लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करता है।

आरोप है कि प्रभात कुमार को 16 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और 17 जून को सीबीआई की हिरासत में भेजा गया। आरोपी का दावा है कि उसे बड़ा हिंदू राव पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां चार सीबीआई अधिकारियों ने उसकी बुरी तरह पिटाई की। मेडिकल रिकॉर्ड (MLC) में यह बात सामने आई कि आरोपी के कान में खून जम गया था, जिससे उसे सुनने में दिक्कत हो रही थी और उसकी बाईं जांघ पर भी चोट के निशान थे।

कोर्ट ने पाया कि ये आरोप केवल मौखिक नहीं हैं, बल्कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा तैयार मेडिकल रिपोर्ट से भी मेल खाते हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि जांच में न केवल उन अधिकारियों की पहचान की जाए जिन्होंने मारपीट की, बल्कि उन सुपरवाइजरी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए जिनकी देखरेख में यह सब हुआ। अगर जांच में कोई आपराधिक अपराध या विभागीय लापरवाही मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि यह पूरा मामला नकली दवा रैकेट से जुड़ा है, जिसमें पहले भी आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत और दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार सिंह जैसे कई लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।