Delhi: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ पक्षपात के आरोपों को गंभीरता से लिया है। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज विजय कुमार दहिया ने दो क्रिमिनल केसों में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है औ
Delhi: दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के खिलाफ पक्षपात के आरोपों को गंभीरता से लिया है। प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज विजय कुमार दहिया ने दो क्रिमिनल केसों में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है और संबंधित मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब आरोपियों ने कोर्ट में ट्रांसफर याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं हो रहा है।
किन मामलों में लगी रोक और क्या हैं आरोप?
कोर्ट ने ‘Advik Capital Ltd vs Fairplan Distributors Pvt Ltd’ और ‘Rajesh Kumar Kaushik vs Vipin Sharma’ नाम के दो मामलों में स्टे लगाया है। याचिकाकर्ता अमित सराओगी और दयानंद राय ने आरोप लगाया कि मजिस्ट्रेट का रवैया पक्षपाती है। एक याचिका में यह भी कहा गया कि बिजनेसमैन विकास गर्ग और उनकी कंपनियों से जुड़े कई केस बहुत कम समय के अंतराल पर एक ही कोर्ट में लिस्ट किए जा रहे थे, जिससे निष्पक्ष सुनवाई पर शक पैदा हुआ।
कोर्ट ने अब आगे क्या आदेश दिए हैं?
जज विजय कुमार दहिया ने निर्देश दिया है कि ट्रांसफर याचिका की एक कॉपी संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजी जाए। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट से इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया मांगी है, जिसे ‘सील्ड कवर’ (बंद लिफाफे) में अगली सुनवाई की तारीख तक जमा करना होगा। यह आदेश दिल्ली हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले ‘Directorate of Enforcement v. Ajay S. Mittal’ का हवाला देते हुए दिया गया है। अब अगली सुनवाई तक इन दोनों केसों में कोई भी कार्यवाही नहीं होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
तीस हजारी कोर्ट ने किस आधार पर कार्यवाही पर रोक लगाई?
कोर्ट ने यह रोक इसलिए लगाई क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने presiding officer (मजिस्ट्रेट) पर पक्षपात करने और प्रक्रिया में अनियमितता बरतने के गंभीर आरोप लगाए थे।
इस मामले में आगे की प्रक्रिया क्या होगी?
संबंधित मजिस्ट्रेट को नोटिस भेजा गया है और उनसे सील्ड कवर में जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई के बाद ही तय होगा कि केस की कार्यवाही कैसे आगे बढ़ेगी।